बंगाल हिंसा पर अयोध्या के संतों का गुस्सा, राष्ट्रपति शासन की मांग तेज

अयोध्या
शुक्रवार को रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कुछ हिस्सों में दो समुदायों के बीच झड़प हुई। हिंसा में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मामले को शांत करते हुए पुलिस ने प्रभावित जांगीपुर और रघुनाथगंज इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। इस घटना को लेकर अब अयोध्या के संतों ने विरोध दर्ज कराया है और ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा है। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने शोभा यात्रा पर हुई पत्थरबाजी की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "ममता बनर्जी कट्टर समुदाय को पाल कर रखती हैं और एक ही समुदाय को खुश करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अब उनकी सत्ता जाने वाली है क्योंकि उन्होंने हमारे भगवान श्री राम की शोभा यात्रा पर पथराव किया है। इन्होंने गैंग बना रखी है, जिसका काम सिर्फ पथराव करना और हमारे समुदाय को नुकसान पहुंचाना है। ममता जैसे लोग ही हैं, जो भारत में रहकर शरिया कानून लाना चाहते हैं।"

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उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश जैसे हालात हैं, जहां हिंदुओं पर अत्याचार होता रहा है, और इसके पीछे ममता सरकार का बड़ा हाथ है, लेकिन अब समय आ गया है कि वहां के हिंदू और सनातनी लोग उन्हें जवाब देने वाले हैं और सत्ता से बेदखल करने वाले हैं।
वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में हुई घटना को पीड़ादायक बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की जरूरत है क्योंकि अब बात हाथ से निकल चुकी है। ममता बनर्जी आतंकवादियों के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करना चाहती हैं। जैसा हाल पहले बांग्लादेश का हुआ था, अब उसी नक्शेकदम पर पश्चिम बंगाल पहुंच चुका है। वहां भी हिंदुओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है और अगर स्थिति को संभाला नहीं गया तो हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।" जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि बंगाल की पुलिस भी सरकार और आतंकियों के इशारे पर काम करती है और हिंदूओं की किसी मामले में सुनवाई नहीं होती है।

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