8वें वेतन आयोग में न्यूनतम ₹69,000 सैलरी, छुट्टी के बदले मिलेगा पैसा, 3x DA और अन्य लाभ

नई दिल्ली

 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बड़ी हलचल है और अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (National Council– Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने अपना विस्तृत मेमोरेंडम सरकार और वेतन आयोग को सौंप दिया है, जिसमें सैलरी, भत्तों, छुट्टियों और पे स्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े बदलावों की मांग की गई है। अगर ये मांगें लागू होती हैं, तो कर्मचारियों की आय और सुविधाओं में बड़ा इजाफा हो सकता है।

न्यूनतम वेतन ₹69,000 और ग्रेच्युटी में ढील
सबसे बड़ी और चर्चा में रहने वाली डिमांड है, न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने की। इसके साथ ही हर साल 6% की वृद्धि और प्रमोशन के समय कम से कम ₹10,000 की बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। संगठन ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों को 30 दिन का न्यूनतम बोनस गारंटी के साथ दिया जाए और ग्रेच्युटी के नियमों में भी ढील दी जाए।

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छुट्टियों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव रखा गया है। मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने, पैटरनिटी लीव 45 दिन करने औरअर्न्ड लीव (EL) को बिना सीमा के जमा करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, 600 दिन तक लीव इनकैशमेंट और 20 साल की सेवा के बाद 50% इनकैशमेंट की सुविधा देने की बात भी कही गई है। महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल लीव और 60 दिन का पैरेंट केयर लीव भी प्रस्ताव में शामिल है।

बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस (CEA) को ₹10,000 प्रति माह प्रति बच्चे करने और इसे पोस्ट ग्रेजुएशन तक लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल सब्सिडी को ₹35,000 प्रति माह तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कर्मचारियों पर शिक्षा का खर्च कम हो सके।

भत्तों (Allowances) में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। NC-JCM चाहता है कि सभी भत्तों को तीन गुना किया जाए और उन्हें महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए। इसके अलावा रिस्क अलाउंस ₹10,000 प्रति माह, नाइट ड्यूटी अलाउंस बेसिक सैलरी के आधार पर और सभी कर्मचारियों के लिए ड्रेस अलाउंस की मांग भी की गई है।

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फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने की डिमांड भी अहम है, क्योंकि इसी के आधार पर नई सैलरी तय होती है। साथ ही पे लेवल्स को मर्ज और अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर को आसान और संतुलित बनाया जा सके।

ये मेमोरेंडम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार और 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं में कितना बदलाव आता है।