भारत की गिरती जन्म दर पर एलन मस्क की चिंता: रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंचा TFR

नई दिल्ली
टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने भारत की जनसंख्या संबंधी बदलती तस्वीर पर चिंता जताई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हालिया प्रजनन दर के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने कहा कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है और देश के शिक्षित वर्ग में यह दर कई वर्ष पहले ही इस स्तर से नीचे आ गई थी.

मस्क ने अपने पोस्ट में लिखा, 'भारत की जन्म दर रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे गिर चुकी है. सबसे अधिक शिक्षित आबादी में यह दर कई साल पहले ही रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच गई थी.' उनकी यह टिप्पणी 2024 के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की रिपोर्ट के बाद आई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 2.1 से 1.9 बच्चे प्रति महिला रह गई है.

क्या होता है रिप्लेसमेंट लेवल?
जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार 2.1 बच्चे प्रति महिला की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट लेवल माना जाता है. इसका अर्थ है कि एक जनरेशन (पीढ़ी) अपनी अगली जनरेशन को बिना माइग्रेशन (प्रवासन) के स्थिर रूप से रिप्लेस कर सके. यदि किसी देश की प्रजनन दर लंबे समय तक रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे बनी रहती है, तो जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ जाती है और भविष्य में नकारात्मक भी हो सकती है.

See also  ईरानी हमले में बर्बाद हुआ US एयरफोर्स का E-3 Sentry विमान, कीमत ₹6600 करोड़

जनसंख्या वृद्धि के नकारात्मक (Negative Population Growth) होने का मतलब है कि किसी देश या क्षेत्र में लोगों की कुल संख्या बढ़ने के बजाय घटने लगे. सरल शब्दों में: यदि जन्म लेने वाले लोगों की संख्या + आने वाले प्रवासी (Immigrants), मरने वाले लोगों की संख्या + बाहर जाने वाले प्रवासी (Emigrants) से कम हो जाए, तो जनसंख्या वृद्धि दर नकारात्मक हो जाती है.

नेगेटिव पॉपुलेशन ग्रोथ क्या है?
उदाहरण के लिए: एक साल में 10 लाख बच्चे पैदा हुए और 12 लाख लोगों की मृत्यु हो गई. प्रवासन का प्रभाव शून्य रहा. मतलब दूसरे देश से कोई प्रवासी नहीं आया और अपने देश से कोई बाहर नहीं गया तो ऐसी स्थिति में आबादी 2 लाख कम हो जाएगी. इसे नकारात्मक जनसंख्या वृद्धि कहा जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम प्रजनन दर से आबादी के बूढ़े होने, वर्क फोर्स कम होने, पेंशन, हेल्थ सर्विस, और सोशल वेलफेयर पर खर्च बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं.

See also  बांग्लादेश चुनाव में BNP की प्रचंड जीत, जमात की उम्मीदें टूटीं; PM मोदी ने तारिक रहमान को दी शुभकामनाएं

कम बच्चे पैदा होने से समाज में बुजुर्गों का अनुपात बढ़ जाता है. युवाओं की संख्या कम होने से उद्योगों और सेवाओं में श्रमिकों की कमी हो सकती है. वर्क फोर्स की कमी का मतलब प्राडक्शन और टैक्स कलेक्शन में कमी आना. अधिक बुजुर्ग आबादी के कारण सरकारों को पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है. यानी ऐसी स्थिति में सरकार की आमदनी घटती है और खर्चा बढ़ जाता है.

भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 की 'स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन' रिपोर्ट में भी भारत की प्रजनन दर 1.9 बच्चे प्रति महिला बताई गई है, जो रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम है. हालांकि 1.46 अरब से अधिक आबादी के साथ भारत अब भी दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, लेकिन नए आंकड़े संकेत देते हैं कि देश अब जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) के नए दौर में प्रवेश कर रहा है. इस चरण की पहचान छोटे परिवारों, कम प्रजनन दर और धीमी जनसंख्या वृद्धि से होती है.

See also  स्वीडन में सख्त इमिग्रेशन नियम लागू, ‘खराब व्यवहार’ पर भी रेजिडेंसी परमिट हो सकता है रद्द

जन्म दर और प्रजनन दर में अंतर
अक्सर जन्म दर (Birth Rate) और प्रजनन दर (Fertility Rate) को एक ही माना जाता है, लेकिन दोनों अलग-अलग संकेतक हैं. जन्म दर (Birth Rate): किसी वर्ष में प्रति 1,000 आबादी पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या. कुल प्रजनन दर (TFR): एक महिला के जीवनकाल में औसतन पैदा होने वाले बच्चों की संख्या है. दोनों संकेतक आपस में जुड़े हुए हैं.

जब प्रजनन दर लगातार घटती है तो समय के साथ जन्म दर भी कम होती है, जिससे जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और समाज में बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ने लगता है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में सिर्फ- बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड ही ऐसे राज्य हैं जहां प्रजनन दर अब भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बनी हुई है.