इतने दिन भूखे रहने के बाद भी सरकार झुकने को तैयार नहीं है, यह लोकतांत्रिक देश नहीं हो सकता : सांसद चंद्रशेखर आज़ाद

यह लोकतांत्रिक देश नहीं हो सकता : सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भीम आर्मी चीफ और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है。उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इतने दिनों तक अनशन चलने के बाद भी सरकार द्वारा उनकी बात न सुनना लोकतंत्र का अपमान और तानाशाही है|

 

सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा मुझे बड़ी पीड़ा हो रही है आपके 8-10  दिनों के भूखे रहने के बाद सरकार झुकने को तैयार नहीं है। यह लोकतांत्रिक देश नहीं हो सकता, यहां तो आंदोलन के आगे बड़ी-बड़ी सरकारे झुक जाया करते थे। लेकिन अब तो डिक्टेटरशिप हो गई है। मर जाए, आत्महत्या कर ले, कोई फर्क नहीं पड़ता मैं सच कह रहा हूं मेरे पास समय नहीं है समय की कमी नहीं होती तो मैं उनके साथ ही बैठ जाता और अगर मैं बैठ जाऊं तो वहां कम से कम एक दिन में लाखों लोग आएंगे। सरकार को पता चल जाएगा ।

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यह लोकतांत्रिक देश नहीं हो सकता : सांसद चंद्रशेखर आज़ाद उतना ही इम्तिहान ले सरकार जितना कर सकते हैं। बारिश में बच्चों को मुझे बड़ी पीड़ा हो रही है। उन्होंने अपने दिल्ली की टीम से कहा कि सब उनकी मदद करें।

संसद में आगे कहा कि उन्हें पता नहीं आंदोलन कैसे होता है। अभी तो वह नए-नए आंदोलन में आए हैं अभी तो उनको सीखना पड़ेगा सब चीजे। सरकार से थोड़ी ना लड़ा जा सकता है। सरकार के लोग भेज के सरकार गुंडागर्दी कर दे। अभी बहुत कुछ सीखना है कोई अचानक से बैठ गए हैं।

यह लोकतांत्रिक देश नहीं हो सकता : सांसद चंद्रशेखर आज़ाद : आपको क्या पता क्या क्या प्रेशर था की भाई बैठ गए कि साहब जो है उनको पता नहीं उनके आंदोलन प्रेशर है या नहीं। सरकार सुनेगी नहीं सुनेगी भूख हड़ताल पर बैठ गए और मर भी जाएगे तो भी सरकार नहीं सुनेगी। उल्टा आरोप लगा देगी की साहब इन्होंने ही मार दिया। यहां तो बहुत अजीब स्थिति हो गई है।

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इतने दिन भूखे रहने के बाद भी सरकार झुकने को तैयार नहीं है, यह लोकतांत्रिक देश नहीं हो सकता : सांसद चंद्रशेखर आज़ाद

चंद्रशेखर आजाद ने सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर अपनी एकजुटता दिखाते हुए निम्नलिखित मुख्य बातें कही हैं:
  • सरकार पर निशाना: उन्होंने व्यक्त किया कि यह बहुत पीड़ादायक है कि कई दिनों तक भूख हड़ताल पर रहने के बावजूद सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगें नहीं सुन रही है
  • तानाशाही का आरोप: उन्होंने वर्तमान स्थिति को लोकतांत्रिक न बताते हुए इसे तानाशाही की संज्ञा दी और कहा कि एक समय था जब आंदोलनों के आगे सरकारें झुक जाती थीं
  • बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी: आजाद ने कहा कि यदि उनके पास समय की कमी नहीं होती, तो वे खुद सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ धरने पर बैठ जाते, उन्होंने चेतावनी दी कि जिस दिन वे इस आंदोलन में शामिल हो गए, उस दिन वहां जनसैलाब उमड़ पड़ेगा

 

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