CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने रचा इतिहास, पैरा शॉट पुट में जीता गोल्ड; 20 साल बाद भारत को मिला पदक

ग्लासगो

पोलियो ने बचपन में कदम रोक दिए, घरेलू हिंसा ने जिंदगी को दर्द से भर दिया, लेकिन शर्मिला धनखड़ ने कभी हार मानना नहीं सीखा। हरियाणा के रेवाड़ी की इस पैरा एथलीट ने मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया।

2 साल की उम्र में पोलियो का शिकार होने के बाद उन्होंने लंबे संघर्ष का सामना किया और निजी जीवन की चुनौतियों से निकलकर खेलों में अपनी अलग पहचान बनाई। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में पदक से चूकने का दर्द भी उन्हें नहीं रोक सका। चार साल बाद उसी मंच पर उन्होंने महिला शॉट पुट F57 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर साबित कर दिया कि हौसले के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।

शर्मिला धनखड़ ने जीता गोल्ड
शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला शॉट पुट F57 वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। फाइनल मुकाबले में शर्मिला ने छह प्रयासों में 9.48, 9.58, 9.81, 9.17, 9.37 और 9.60 मीटर का थ्रो किया। तीसरे प्रयास में किया गया 9.81 मीटर का थ्रो निर्णायक साबित हुआ और कोई भी प्रतिद्वंद्वी उनके इस प्रदर्शन को पीछे नहीं छोड़ सका। घाना की जिनाबु इसाह ने 8.65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ सिल्वर मेडल जीता। वहीं भारत की शिल्पा ने 7.26 मीटर का थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

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भारत के मेडल की संख्या हुई 10
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 5वें दिन की हमारी कवरेज यहीं खत्म होती है. भारत के लिए यह बहुत सफल दिन रहा और अब भारत के मेडल की संख्या 10 हो गई है. आज छह मेडल जीते। 

1. शर्मिला धनखड़, गोल्ड: महिलाओं का पैरा शॉट पुट F57

2. ज्ञानेश्वरी यादव, सिल्वर: महिलाओं का 53kg वेटलिफ्टिंग

3. वल्लूरी अजय बाबू, सिल्वर: पुरुषों का 79kg वेटलिफ्टिंग

4. सर्वेश अनिल कुशारे, सिल्वर: पुरुषों का हाई जंप

5. बिंद्यारानी देवी, ब्रॉन्ज़: महिलाओं का 58kg वेटलिफ्टिंग

6. शिल्पा के शायला, ब्रॉन्ज़: महिलाओं का पैरा शॉट पुट F57

शर्मिला ने रचा इतिहास
शर्मिला ने 9.81m के अपने सीज़न बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड जीता, जिससे कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स मेडल के लिए भारत का 20 साल का इंतज़ार खत्म हुआ. वह पैरा एथलेटिक्स में भारत की पहली CWG गोल्ड मेडलिस्ट और गेम्स में पैरा एथलेटिक्स मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं। 

शिल्पा कंचुगाराकोप्पलु शायला ने 7.26 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता.

इन दो मेडल के साथ भारत ने CWG में पहली बार एक ही पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में दो पदक जीते.

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2 साल की उम्र में पोलियो, घरेलू हिंसा से हुईं परेशान
शर्मिला की यह सफलता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है। इसके पीछे संघर्ष, दर्द और हौसले की लंबी कहानी छिपी है। 15 अगस्त 1986 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के छिठरोली गांव में जन्मीं शर्मिला महज दो साल की थीं, जब तेज बुखार के बाद उन्हें पोलियो हो गया। इसके बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। शारीरिक चुनौतियों के साथ-साथ उन्हें निजी जीवन में भी कठिन दौर से गुजरना पड़ा। कम उम्र में शादी के बाद उन्हें पहले विवाह में घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। बाद में परिवार के सहयोग से उन्होंने नई शुरुआत की और अब अपने पति अजीत सिंह तथा दो बच्चों के साथ

वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर
भारत के पदक अभियान में वल्लूरी अजय बाबू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 79 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 330 किलो ग्राम वजन उठाया और गोल्ड मेडल से महज एक किलोग्राम से चूक गए. मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलो ग्राम के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता। 

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वल्लूरी अजय बाबू की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास राव की उपलब्धि को एक कदम आगे बढ़ाया है. उनके पिता ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 56 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अब 16 साल बाद उनके बेटे ने सिल्वर मेडल जीतकर परिवार की पदक परंपरा को आगे बढ़ाया है। 

वल्लूरी गोल्ड मेडल के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन एरी हिदायत मुहम्मद से सिर्फ एक किलोग्राम पीछे रह गए. मुकाबला आखिरी लिफ्ट तक बेहद रोमांचक रहा और भारतीय खिलाड़ी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा. इसी के साथ भारत की कुल पदक संख्या  अब 10 हो गई है, जिसमें 2 गोल्ड शामिल हैं। 

4 साल बाद पूरा किया सपना
2020 में उन्होंने कोच टेक चंद के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया और महज एक साल के भीतर 2021 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत लिया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में शर्मिला चौथे स्थान पर रहकर पदक से चूक गई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। 4 साल बाद उसी मंच पर गोल्ड जीतकर साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प, परिवार का साथ और कड़ी मेहनत किसी भी मुश्किल को जीत में बदल सकती है।