यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : ‘भगवान हर जगह हैं’ का ये मतलब नहीं कि आप ट्रेन की बर्थ पर दीया जलाकर पूजा करने बैठ जाएं. उधर आग सूंघते ही फायर अलार्म बज जाता है. अलार्म नहीं बजा तब भी आग अपना काम जानती है. कोच के परदे, प्लास्टिक और रजाई-चादर से अगर उसका ‘मेल-मिलाप’ हो गया तो वो ये नहीं सोचेगी कि ये तो ‘आरती की आग’ है. छोड़ देते हैं. वह तो पूरी ट्रेन खाक कर देगी. पूजा-अर्चना की ऐसी जिद हजारों लोगों की जान मुसीबत में डाल देगी.
यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : सोशल मीडिया पर एक ट्रेन के एसी कोच का वीडियो वायरल है. कहां का है, किस ट्रेन का है, अभी पता नहीं है. झारखंड रेल यूजर्स नाम के एक्स अकाउंट से इसे शेयर किया गया है. इसमें एक श्रद्धालु किस्म के यात्री हैं. उन्हें एसी कोच की ऊपरी बर्थ मिली है.
पता नहीं कोई मन्नत थी या रोजाना पूजा करने का उनका अनुशासन. रेलवे के सारे नियम-कायदे ताक पर रखकर वह बर्थ पर ही ‘हवन-कुंड’ जलाकर बैठ जाते हैं. पद्मासन में बैठे पंडित जी के आरती के दीये की गर्मी एसी कोच के ठंडे माहौल में धूप की सुगंध के साथ बाकी यात्रियों की नाक और आंखों में भी पड़ती है.

यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : वीडियो में उनके आसपास के लोग तो चुप बैठे हैं. शायद ‘धार्मिक भावनाओं के आहत करने का डर’ हो, जो आजकल किसी बड़े अपराध से कम तो नहीं माना जाता, लेकिन एक भाई साहब हिम्मत जुटाते हैं. उन्हें ट्रेन के हर यात्री की सुरक्षा की चिंता थी, सो वीडियो कैमरा ऑन करके पंडित जी के पास गए और पुकारा-
अरे पंडित जी.
यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : धूप-दीये के सामने माला फेर रहे पुजारी कोई हरकत नहीं करते. फिर वीडियो बनाने वाले शख्स आसपास के लोगों से पूछते हैं कि ‘ये आपके साथ हैं क्या?’ जवाब आता है- ‘नहीं’. पूजा करने वाले इसके बाद भी कोई जवाब नहीं देते. वो माला फेरने में लगे रहते हैं. तभी वीडियो बनाने वाले शख्स की आवाज आती है,
वो जो हरकत कर रहा है न. वो सारी पब्लिक को नुकसान करेगा. ध्यान रखना ये. ओ पंडित जी… ओ दादा…. ये क्या कर रहे हो आप. पूजा-पाठ हो रही है… दिया लग रहा है… भाई साहब… आग तो बंद करवा दो यार… अभी फायर अलार्म बज जाएगा तो क्या कर लोगे आप.
यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : इन सारी पुकारों का कोई खास जवाब नहीं आता. पूजा बदस्तूर जारी रहती है. अब आप सोचिए. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) दिन-रात चिल्ला-चिल्लाकर थक जाता है कि ‘ट्रेन में ज्वलनशील पदार्थ न ले जाएं.’ बोर्ड भी लगे होते हैं. अनाउंसमेंट होते हैं. पकड़े जाने पर जुर्माना भी ठोका जाता है लेकिन हमारा नागरिकबोध न तो वह कोई सुरक्षा निर्देश मानने को तैयार है. न उसे अपनी ऐसी हरकतों का खतरा ही समझ आता है.
यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : यहां बात किसी की आस्था में बाधा बनने की नहीं है. बात तार्किकता की है. यानी आपकी भक्ति में चाहे जितनी शक्ति हो लेकिन ट्रेन बिल्कुल भी केवल ‘आगरोधी’ चीजों से नहीं बनी होती. उसके पुर्जों में प्लास्टिक भी होता है. लकड़ी भी है. कपड़े भी होते हैं. वहां दीये की एक छोटी सी लौ एक पल में पूरी ट्रेन को ‘द बर्निंग ट्रेन’ बना सकती है.

यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : नियम क्या कहते हैं?
तभी तो रेलवे ने नियम बनाए हैं कि कुछ चीजें आप ट्रेन में लेकर न ही चढ़ें. गैस सिलेंडर, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, पटाखे, माचिस की डिब्बी जैसी चीजें ट्रेन में प्रतिबंधित हैं. ये पंडित जी ने पूजा-पाठ का जो अनुष्ठान डिब्बे में किया है, उसके लिए तो बाकायदा दंड प्रावधान हैं.
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यात्री ट्रेन की एसी बर्थ पर दीया जलाकर करने लगा पूजा : इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे एक्ट 1989 की धारा 67, 154, 164 और 165 के तहत ट्रेनों में आग पकड़ने वाले और विस्फोटक सामान ले जाना दंडनीय अपराध है. जन विश्वास अधिनियम, 2026 के प्रावधानों और धारा 165 के तहत अगर कोई ट्रेनों में खतरनाक सामान ले जाता है तो उस पर कम से कम 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा. इसके अलावा, अगर उससे किसी तरह का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई भी आरोपी व्यक्ति को ही करनी होगी. जुर्माना न भरने की सूरत में 1 साल तक की जेल या कम से कम 10 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है.
🚆A video circulating on social media shows a passenger performing prayers on the upper berth of an AC train coach while lighting incense sticks and an oil lamp.
A fellow passenger reportedly intervened, explaining that such acts can be dangerous. Smoke may trigger the train’s… pic.twitter.com/79SrmBnAdW
— Jharkhand Rail Users (@JharkhandRail) July 26, 2026