जांजगीर जिला के चांपा थाना में दलित युवक की पुलिस हिरासत में मौत के बाद भी दादागिरी नहीं रुकी। तत्काल अंतिम संस्कार कराने के लिए परिजनों पर अनावश्यक दबाव बनाने लगी। भारी संख्या में दल बल के साथ पुलिस मृतक के घर पहुंच गई। परिजनों के नहीं मानने पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार देखने को मिला । इस घटना का जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है | इस मामले में पुलिस कप्तान विजय पांडे ने आनन फानन में थानेदार अशोक वैष्णव को और सहायक उप निरीक्षक बाबूलाल दिवाकर को भी पुलिस लाइन भेज दिया।
आपको बता दें कि शराब के एक मामले में महेंदीपारा चांपा निवासी शिव सहिस उम्र 30 वर्ष को चांपा पुलिस ने शराब के मामले में घर से गिरफ्तार किया था| इसके दूसरे दिन परिजनों को पुलिस ने बताया कि उसकी तबीयत खराब हो गई है| जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो युवक की मौत हो चुकी थी।
मृतक के भाई ने बताया कि 9 सितंबर की दोपहर 1:00 बजे ईश्वरी राठोर और बाबूलाल दिवाकर एक अन्य पुलिसकर्मी व महिला पुलिसकर्मी के साथ घर पहुंचे थे| घर की तलाशी ली गई लेकिन कुछ नहीं मिला| उसके बाद पूछताछ के लिए थाना ले जाने की बात कह कर शिवा को लेकर गए| पीछे-पीछे उनकी भाभी रुख्मनी भी चली गई शाम के 5:00 बज गए लेकिन पुलिस वालों की पूछताछ खत्म नहीं हुई |भाभी घर आकर खाना बना कर वापस शाम 7:00 बजे थाना पहुंची| जहां कहा गया कि उसे जेल भेजा जाएगा | सुबह उनको फोन पर सूचना मिली कि शिव की तबीयत खराब हैl परिजन जिला चिकित्सालय पहुंचे जहां पर उन्हें शिव की लाश मिली|
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इसके बाद परिजनों ने थाना परिसर में न्याय की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया| परिजनों ने पुलिस विभाग के सामने मांग रखी की मृतक के आश्रितों को 50 लख रुपए एक नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का खर्च दें | जिस पर उन्हें अंतिम संस्कार करने के लिए ढाई लाख रुपए दिए गएl वही मृतक की पत्नी को 25 हजार रुपए मासिक वेतन के रूप में किसी कारखाने में नौकरी देने की बात कही | जिसमें उन्हें नौकरी में जाने की आवश्यकता नहीं है| जबकि बच्चों की पढ़ाई कराने का भी आश्वासन दिया गया| इसके बाद मामला शांत हुआ और सभी अपने घर लौट गए |
क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील
मृतक के भाई ने बताया कि 11 सितंबर को जब पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव घर लाया गया तब क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था| बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे और जल्दी ही अंतिम संस्कार करने के लिए परिजनों पर दबाव डाल रहे थे | परिजनों का कहना था कि अभी उनके रिश्तेदार नहीं पहुंचे हैं उनके आने के बाद अंतिम संस्कार करेंगे लेकिन पुलिस अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं थे और बलपूर्वक लाश को शमशान घाट लेकर गए|

शरीर पर कहीं लाल कहीं नील धब्बे
मृतक के भाई ने बताया कि अंतिम संस्कार के पूर्व परिजनों ने लाश को चीता में रखने से पहले शरीर को घूम कर देखा जिसमें पता चला कि शरीर पर मार के निशान साफ-साफ दिखाई दे रहे थे| शरीर पर कहीं लाल कहीं नील धब्बे दिख रहे थे| पुलिस की मौजूदगी में मृतक का अंतिम संस्कार किया गया |
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2 सामाजिक कार्यकर्ता को किया डीटेन
सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया की वे मृतक शिव के घर संतावना देने पहुंचे हुए थे | इसी दौरान पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया| जिसके बाद उन्हें थाना ले जाकर बैठा दिया | साथ ही उनके साथ थाना में अभद्रता करते हुए उनके मोबाइल फोन को छिनकर तोड़ दिया| उन्होंने कहा की पुलिस की इस तरह की हरकत करना लोकतंत्र की हत्या करना है|
हॉस्पिटल लाने से पहले हो चुकी थी मौत
मृतक के संबंध में जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉक्टर बीएल जागृति ने बताया कि जब शिव को अस्पताल लाया गया था तब उसकी पहले ही मौत हो चुकी थी| जिसकी सूचना पुलिस को दी गई थी | उन्होंने बताया कि दो डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया l जिसमें एक फोरेंसिक डॉक्टर और एक जिला चिकित्सालय के डॉक्टर से मजिस्ट्रेट पीएम कराया गया |
पुलिस को अंतिम संस्कार कराने की जल्दी क्यों
सामाजिक कार्यकर्ता संजीत बर्मन सहित भीम आर्मी के पदाधिकारी ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब शिव की मौत मिर्गी दौरा पड़ने से हुई थी, तो फिर पुलिस को अंतिम संस्कार करने की इतनी क्या हड़बड़ी थी| पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था| किसी को भी मृतक के घर के पास जाने की अनुमति नहीं थी| पुलिस अधिकारी मृतक के रिश्तेदारों के आने का इंतजार भी नहीं करने दिया| पुलिसिया दबाव में उनका अंतिम संस्कार किया गया|