कुत्ते के नाखून की खरोंच को समझा मामूली, नहीं लगाया एंटी-रेबीज इंजेक्शन, 2 महीने बाद रेबीज से बच्चे की मौत, परिवार में मचा कोहराम

मुरादाबाद बिलारी कोतवाली क्षेत्र के गांव सतारन में कुत्ते के नाखून की मामूली खरोंच 14 वर्षीय किशोर की जान पर भारी पड़ गई। करीब दो महीने पहले उंगली में लगी खरोंच को उसने नजरअंदाज कर दिया और एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया। कुछ दिन पहले उसकी हालत बिगड़ने लगी। गले में दर्द, पानी निगलने में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत के बीच परिजन उसे सीएचसी बिलारी से जिला अस्पताल, फिर मेरठ और दिल्ली तक ले गए, लेकिन रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और मां गश खाकर बेहोश हो गई।

 

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गांव सतारन निवासी राकेश के चार बेटों में 14 वर्षीय अतुल भी था। करीब दो महीने पहले उसके हाथ की उंगली में कुत्ते का नाखून लग गया था। स्कूल में शिक्षामित्र विजयलक्ष्मी ने उसे कई बार एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी थी। हालांकि, अतुल ने इंजेक्शन लगवा लेने की बात कही, लेकिन इंजेक्शन नहीं लगवाया था। बीते चार-पांच दिन से अतुल को बुखार आ रहा था। इसी दौरान उसकी उंगली में भी संक्रमण हो गया। दो दिन पहले गले में दर्द और पानी निगलने में परेशानी होने लगी तो परिजन उसे सीएचसी बिलारी लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से उसे मेरठ भेजा गया और फिर दिल्ली रेफर कर दिया गया।

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परिजनों के मुताबिक, हालत लगातार बिगड़ती गई। अतुल को सांस लेने और पानी निगलने में भी परेशानी हो रही थी। परिजन उसे बेहतर इलाज दिलाने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक दौड़ते रहे, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। शव गांव पहुंचने पर परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां फूलवती बेटे की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकीं और गश खाकर बेहोश हो गईं।

रेबीज टीका लगता तो ऐसी स्थिति नहीं होती

सीएचसी प्रभारी, राजपाल सिंह ने बताया कि एक दिन पहले परिजन छात्र को गंभीर हालत में सीएचसी लेकर आए थे। उसमें हाइड्रोफोबिया के गंभीर लक्षण थे। उसे पानी निगलने में परेशानी हो रही थी और पानी पीने की कोशिश पर घबराहट हो रही थी। उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। कुत्ते के नाखून की खरोंच लगने के बाद समय से एंटी रेबीज टीका लगवा लिया जाता तो ऐसी स्थिति से बचाव संभव था।

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