JJohar36garh News|छत्तीसगढ़ में धान बेचने के लिए किसान बारिश और ठंड में जद्दोजहद करते रहे। वहीं लाखों रुपए की धान खरीदी कागजों पर हो गई। यह कारनामा कर दिखाया है समिति और तहसील के कर्मचारियों ने मिलकर। उन्होंने पहले सरकारी जमीन पर धान उगाई, फिर उसी का फर्जी किसानों से पंजीयन भी करा दिया। खरीदी की और रुपयों का भुगतान भी हो गया। मामला जांजगीर जिले का है। अब केंद्र प्रभारी सहित 5 के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
दरअसल, जिले के नवागढ़ ब्लॉक के तुलसी और किरीत धान खरीदी केंद्र में गड़बड़ी हो रही थी। इसकी शिकायत एक किसान उमेश सिंह ने कलेक्टर से की है। आरोप है कि धान खरीदी केंद्र तुलसी में पंजीकृत कई ऐसे किसानों के नाम हैं, जो सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि के मालिक बताए गए हैं। खास बात यह है कि जो जमीन धान बेचने के लिए पंजीकृत कराई गई है, वही शासन के ऑनलाइन पोर्टल में भी शासकीय भूमि के तौर पर रिकॉर्ड में है।
आरोप है कि तुसली धान खरीदी केंद्र के एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने 10 लाख रुपए का धान बेचा है। जबकि उसके नाम पर एक डेसिमल जमीन भी नहीं है। ऐसे ही एक कंप्यूटर ऑपरेटर ने लाखों रुपए अपने खाते में ट्रांसफर किए हैं, जबकि धान बिक्री के रिकार्ड में किसी अन्य का नाम दर्ज है। इसके अलावा दोनों केंद्रों से रिश्तेदारों के नाम पर भी धान खरीदी कर रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। दोनों केंद्रों से मिलाकर एक करोड़ के फ्रॉड की बात कही जा रही है।
कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला की जांच में शिकायत सही निकली। फिर नवागढ़ तहसील कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर राम कुमार कुर्रे, तुलसी धान खरीदी केंद्र के प्रभारी अजय नागेश, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रहलाद कश्यप, किरीत खरीदी केंद्र प्रभारी राम नारायण कश्यप, कंप्यूटर ऑपरेटर गांधी दास महंत के खिलाफ नवागढ़ थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया है। हालांकि बताया जा रहा है कि मामला खुलने के बाद से ही सभी आरोपी गायब हैं।
कलेक्टर ने जांच के लिए एक टीम बनाई थी। इस जांच में कि तहसील कार्यालय नवागढ़ के एक बाबू की भी संलिप्ता सामने आई है। उनके खिलाफ भी सबूत जुटाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले की शिकायत होने से पहले किसानों ने धान बिक्री कर पैसा भी उठा लिया गया है। बताया जा रहा रहै कि क्लर्क और कंप्यूटर ऑपरेटर ने मिलकर ही सारी साजिश रची है। इसके प्रमाण भी जांच टीम को मिले हैं। फिलहाल सारे दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं।