जबलपुर में कॉन्स्टेबल ने वकील को पीटा, 14 दिन बाद FIR; वीडियो देखकर भी अफसर नहीं माने, हाईकोर्ट में याचिका

जबलपुर
जबलपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अधिवक्ता के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस आरक्षक पर घर में घुसकर हमला करने के आरोप के बाद पहले पुलिस की निष्क्रियता और फिर देरी से दर्ज एफआईआर ने पूरे घटनाक्रम को विवादों में ला दिया है। अब मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां 29 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है।

मामूली विवाद से शुरू हुआ हिंसक घटनाक्रम-समीक्षा टाउन निवासी अधिवक्ता पंकज शर्मा के अनुसार 11 अप्रैल की शाम बच्चों के शोर को लेकर हुए विवाद के बाद मदनमहल थाने में पदस्थ आरक्षक साकेत तिवारी उनके घर पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आई महिलाओं और पड़ोसियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया।

सबूत होने के बावजूद नहीं हुई तत्काल कार्रवाई-घटना के बाद पीड़ित अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि पुलिस ने स्पष्ट सबूत होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में रुचि नहीं दिखाई और समझौते के लिए दबाव बनाया।

कोर्ट की शरण के बाद हरकत में आई पुलिस-कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसके बाद 25 अप्रैल को, घटना के लगभग 14 दिन बाद, सिविल लाइन थाने में आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

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एफआईआर की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल-पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र सोनी ने दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एफआईआर जल्दबाजी में और त्रुटिपूर्ण तरीके से दर्ज की गई, जिसमें न तो आवेदक को सूचित किया गया और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए।

आरोपी ने खाली किया मकान, दबाव के आरोप-एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी आरक्षक ने अपना किराए का मकान खाली कर दिया। वहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर काउंटर केस की धमकी दी गई।

29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई-अब इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ 29 अप्रैल को सुनवाई करेगी, जिसमें मारपीट और कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एफआईआर से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

बच्चों के शोर से आगबबूला हुआ आरक्षक
सिविल लाइन समीक्षा टाउन में रहने वाले अधिवक्ता पंकज शर्मा 11 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे घर पर आराम कर रहे थे। बाहर बच्चों का शोर हो रहा था, जिस पर उनकी पत्नी ने उन्हें शांत होकर खेलने के लिए कहा।

यह बात पास में ही किराए से रहने वाले पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी को पता चली। वह शहर के मदन महल थाने में पदस्थ है। आरक्षक अधिवक्ता के घर पहुंचा और गाली-गलौच करने लगा। पास खड़े पड़ोसियों ने विवाद को शांत कराने की कोशिश की।

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इसी बीच अचानक आरक्षक साकेत तिवारी ने वकील पर हमला कर दिया। पड़ोसी वकील को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आरक्षक लगातार हमला करता रहा, जिससे उनके चेहरे पर चोट आई।

घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सिविल लाइन थाने पहुंचे और टीआई को वीडियो फुटेज के जरिए सिपाही साकेत तिवारी की करतूत बताई, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पीड़ित का कहना था कि कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा था।

वकील बोले- 3 घंटे तक थाने में बैठे रहे
अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना था कि बहुत ही मामूली बात पर वर्दी का रौब दिखाते हुए पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी ने उनके साथ मारपीट की। साकेत पड़ोस में प्रकाश सराठे के घर किराए से रहते हैं।

वकील पंकज शर्मा का आरोप है कि वे रात में तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने FIR दर्ज नहीं की, बल्कि उस पुलिसकर्मी को भी वहां से अलग कर दिया, जो रिपोर्ट दर्ज करता है, ताकि वह शिकायत न लिख सके।

पंकज शर्मा ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे, जिसमें विवाद होता दिख रहा है। मारपीट की जानकारी मिलते ही साथी अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सीएसपी और टीआई ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जांच की बात कही।

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लगातार शिकायतें कीं, कार्रवाई नहीं हुई

अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना है कि पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ लगातार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 29 अप्रैल को सुनवाई होनी है।

पीड़ित को नहीं दी जानकारी
याचिकाकर्ता पंकज शर्मा के वकील धर्मेंद्र सोनी का कहना है कि साकेत तिवारी के खिलाफ जल्दबाजी में जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें कई खामियां हैं, जिन्हें सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना है कि जब एफआईआर दर्ज की जा रही थी, तब आवेदक को न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। जहां पंकज शर्मा के हस्ताक्षर होना थे, वहां किसी और के हस्ताक्षर कर दिए गए।

धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि एफआईआर की कंडिका 7 में आरोपी साकेत तिवारी का नाम होना था, वहां उसके अलावा एक और नाम शैलेंद्र सिंह मार्को का भी लिखा है। वह सिविल लाइन थाने में एएसआई के पद पर पदस्थ हैं और उनका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि जानबूझकर एफआईआर इस तरह लिखी गई है, ताकि बाद में उस पर सवाल खड़े हो सकें।