डिजिटल डिटॉक्स से घट सकता है तनाव, जानें स्मार्टफोन की लत से छुटकारा पाने के आसान तरीके

आज के समय में स्मार्टफोन एक ऐसी चीज है जो हमारी जिंदगी का एक काफी अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह आंखें खोलते ही हम सबसे पहले अपनी जड़ें स्मार्टफोन की स्क्रीन पर टिका लेते हैं और रील्स स्क्रॉल करने लग जाते हैं. यह ऐसा सिलसिला है जो रात को सोने से पहले तक नॉन-स्टॉप चलता ही रहता है. हर समय सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना, नोटिफिकेशन्स चेक करते रहना और हर समय ऑनलाइन रहने की आदत देखते ही देखते हमारे मेंटल स्ट्रेस को बढ़ाने का काम करने लग गयी हैं. इसकी वजह से कई लोग बेवजह ही काफी ज्यादा चिड़चिड़े, थके हुए और बेचैन रहने लग गए हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है तो आपके लिए ‘डिजिटल डिटॉक्स’ यानी कि कुछ देर के लिए अपने स्मार्टफोन से दूरी बनाना काफी जरूरी हो जाता है. जब आप हर दिन थोड़ी देर के लिए अपने स्मार्टफोन से दूरी बनाने लगते हैं, तो इसका काफी पॉजिटिव असर आपके मेंटल हेल्थ पर पड़ता है.

क्या डिजिटल डिटॉक्स से सच में कम हो सकता है स्ट्रेस?
जब आप लगातार अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन की तरफ देखते रहते हैं तो आपके दिमाग को आराम करने का समय बिलकुल भी नहीं मिल पाता है. हर समय आने वाले मैसेजेस, वीडियोज और अपडेट्स आपके दिमाग को बिजी करके रखने का काम करते हैं. धीरे-धीरे यह आपके स्ट्रेस का भी कारण बन सकता है. वहीं, जब आप थोड़ी देर के लिए अपने स्मार्टफोन से दूरी बना लेते हैं, तो आपका दिमाग शांत महसूस करने लग जाता है. जब आप फोन से दूरी बनाने लगते हैं तो आपको बेहतर नींद आती है और साथ ही आपकी फोकस भी बेहतर होता है. इसके अलावा आपका मेंटल स्ट्रेस भी कम होने लगता है. जब आप डिजिटल डिटॉक्स करते हैं तो आपको खुद के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा समय मिल जाता है और आपका मूड भी बेहतर रहने लगता है.

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सुबह उठते ही फोन देखने की आदत छोड़ें
अक्सर हमारी यह आदत होती है कि हम सुबह सोकर उठते ही सोशल मीडिया स्क्रॉल करने लग जाते हैं या फिर मैसेजेस चेक करने लगते हैं. सुबह की यह छोटी सी आदत आपके दिन की शुरुआत को ही स्ट्रेसफुल बना सकती है. ऐसा न हो इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप सुबह सोकर उठने के बाद कम से कम आधे घंटे तक अपने फोन से दूर रहें. इस आधे घंटे के दौरान आप लाइट एक्सरसाइज कर सकते हैं या फिर मेडिटेशन और परिवार के साथ समय बिता सकते हैं. ऐसा करने से आपका दिमाग शांत रहता है और आपके दिन की शुरुआत भी बेहतर होती है.

नोटिफिकेशन को करें कंट्रोल
अगर आपका फोन हर थोड़ी देर में बजता है या फिर उसमें नोटिफिकेशन्स आते रहते हैं, तो यह आपके दिमाग के भटकने का कारण बन सकता है. ऐसा न हो इसलिए सभी जरूरी ऐप्स को छोड़कर बाकी ऐप्स के नोटिफिकेशन्स को बंद कर दें. जब आप ऐसा करेंगे तो आपका मन बार-बार फोन को चेक करने का नहीं करेगा और साथ ही आपके लिए अपने काम पर फोकस करना भी आसान होगा. कम नोटिफिकेशन का मतलब होता है कम मेंटल प्रेशर.

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सोने से पहले रखें फोन दूर
जब आप रात को देर तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते रहते हैं तो आपके नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है. आपके स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आपके दिमाग को पूरी रात एक्टिव करके रख देती है. ऐसा होने की वजह से आपको सोने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसा न हो इसलिए सोने से कम से कम एक घंटे पहले से ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना बंद कर दें. बेहतर होगा कि आप इसकी जगह पर कोई किताब पढ़ें या फिर लाइट म्यूजिक सुनें.

परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं समय
डिजिटल डिटॉक्स का अगर सबसे अच्छा और आसान कोई तरीका हो सकता है तो वह है दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताना. परिवार के साथ बैठकर अपने दिल की बातें शेयर करें, दोस्तों से मिलने जाएं या फिर बाहर कहीं घूमने ही चले जाएं. ये आदतें आपके मेंटल स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं. जब आप अपने फोन की जगह पर दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिताते है तो आपको अंदर से खुशी का एहसास होने लगता है.

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छोटे-छोटे बदलाव से मिलेगा बड़ा फायदा
डिजिटल डिटॉक्स का यह मतलब बिलकुल भी नहीं होता है कि आप अपने स्मर्टफोन का इस्तेमाल करना पूरी तरह से छोड़ दें. इसका मतलब होता है कि आप इसका इस्तेमाल एक बैलेंस्ड तरीके से करें. दिन में कुछ समय ‘नो फोन टाइम’ फिक्स करें और इस समय का इस्तेमाल अपना खाना खाएं, पढ़ाई करें या फिर परिवार के साथ बातें करें.