खर्चों के बीच पैसे बचाने का बहतरीन तरीका : आमतौर पर बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की यही शिकायतें रहती हैं कि महीने के आखिर तक उनके पास कोई सेविंग्स नहीं बचती है. आधी से भी ज्यादा सैलरी तो घर के किराए, ट्रांसपोर्ट, किराने का सामान लाने में ही खर्च हो जाते हैं.
खासकर, अगर मुंबई-बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले कई कामकाजी लोगों के लिए खर्चों को मैनेज करना एक चुनौती बन गया है. इन सबके ही बीच बेंगलुरु में ही रहने वाले एक शख्स ने कुछ ऐसी आसान आदतें बताई हैं, जिनसे उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कोई बड़ा समझौता किए बगैर पैसे बचाने में मदद मिल रही है.
खर्चों के बीच पैसे बचाने का बहतरीन तरीका : अक्षय CN नाम के इस व्यक्ति ने अपने इंस्टाग्राम पेज @bangalore_viral पर ये टिप्स शेयर किए. वीडियो में उन्होंने बताया कि कैसे अपनी लाइफस्टाइल और खर्च करने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल को मेंटेंन रखते हुए भी फालतू के खर्च कम किए. पोस्ट के कैप्शन में अक्षय ने लिखा, “मैंने अपनी लाइफस्टाइल से समझौता किए बगैर बेंगलुरु में अपने खर्च कैसे कम किए.”

खर्चों के बीच पैसे बचाने का बहतरीन तरीका : मेट्रो के पास रहना सबसे किफायती
सबसे पहले तो अक्षय ने अपने रहने के लिए किसी महंगे या फैंसी इलाके को नहीं चुना, बल्कि मेट्रो स्टेशन के पास रहने को अहमियत दी. अक्षय ने लिखा,”मैंने किसी ‘फैंसी’ इलाके में जाने के बजाय मेट्रो के पास रहने का फैसला किया. शुरुआत में किराया थोड़ा ज्यादा लगा, लेकिन रोजाना आने-जाने, पेट्रोल और ऑटो के खर्च में मेरे काफी पैसे बचे और मानसिक तनाव भी कम हुआ.” उन्होंने बताया कि सफर में कम समय लगने और ट्रांसपोर्ट का खर्च कम होने से उनके महीने के खर्च में फर्क साफ देखने को मिला.
खर्चों के बीच पैसे बचाने का बहतरीन तरीका : सहूलियत पर खर्च कम
अक्षय ने बताया कि बेंगलुरु में रहते हुए उन्होंने अपनी सहूलियत के लिए किए जाने वाले खर्च को धीरे-धीरे कम करना शुरू किया. क्विक डिलीवरी, ऑटो सब्सक्रिप्शन और ऑनलाइन छोटी-मोटी खरीदारी से महीने में खर्च का पैमाना धीरे-धीरे बढ़ता गया. अक्षय ने लास्ट मिनट के बजाय पूरे वीकेंड का प्लान पहले से ही बनाना शुरू कर दिया.
खर्चों के बीच पैसे बचाने का बहतरीन तरीका : अक्षय का कहना है कि बिना सोचे-समझे कैफे या पब चले जाना, मन में कुछ अचानक से आने पर खर्च कर बैठना, इन सारी चीजों का तुरंत पता चले बिना ही सेविंग्स पर असर पड़ता है. अक्षय ने आगे कहा, “मैंने बिना सोचे-समझे खर्च करने के बजाय अपने वीकेंड का प्लान बनाना शुरू किया. बिना प्लान के कैफ़ घूमना, पब जाना और अचानक घूमने-फिरने का मन बनाकर खर्च करना, बेंगलुरु में लोगों को पता चलने से कहीं ज्यादा तेजी से बचत को खत्म कर देता है.”
लाइफस्टाइल मेंटेन करने का प्रेशर
वीडियो में अक्षय ने बेंगलुरु के वर्क कल्चर में लोगों पर अपने लाइफस्टाइल को लगातार बेहतर बनाने के दबाव के बारे में भी बात की. यहां कई लोग सिर्फ बाहर से खुद को अपडेटेड दिखाने या अपने आस-पास के ट्रेंड्स के साथ बने रहने के लिए पैसे खर्च करते हैं.
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खर्चों के बीच पैसे बचाने का बहतरीन तरीका : अक्षय ने बताया कि दूसरों की तरह उन्होंने अपने गैजेट्स अपग्रेड करने बंद कर दिए. रोज रेस्टारेंट्स और ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर निर्भर रहने के बजाय घर पर खाना पकाने का भी बचत के साथ-साथ सेहत पर भी असर पड़ा. अपने पोस्ट के आखिर में अक्षय ने लिखा कि सैलरी ज्यादा होने से ही सिर्फ आपकी आर्थिक परेशानियां हल नहीं हो जाती हैं. बेहतर आदतें ज्यादा मायने रखती हैं.
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