AFCON 2025: सालाह रहे बेअसर, सेनेगल ने मिस्र को हराकर फाइनल का टिकट कटाया

टैंजियर्स
सादियो माने के 78वें मिनट में किए गए निर्णायक गोल की बदौलत सेनेगल ने अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (एएफकॉन) 2025 के सेमीफाइनल में मिस्र को 1-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस जीत के साथ ही माने ने अपने पूर्व लिवरपूल साथी और मिस्र के कप्तान मोहम्मद सालाह पर अहम मुकाबले में बढ़त हासिल की।

मैच के बाद 33 वर्षीय माने ने खुलासा किया कि यह उनका आखिरी अफ्रीका कप ऑफ नेशंस टूर्नामेंट है। उन्होंने कहा, “मैं बेहद खुश हूं कि मुझे अपने आखिरी एएफकॉन में खेलने का मौका मिला। मेरी कोशिश होगी कि फाइनल जीतकर ट्रॉफी डकार लेकर जाएं।” पूर्व चैंपियन सेनेगल ने सतर्क रुख अपनाने वाली मिस्र टीम के खिलाफ मैच में गेंद पर ज्यादा नियंत्रण बनाए रखा। अब सेनेगल रविवार को होने वाले फाइनल में मेज़बान मोरक्को से भिड़ेगा।

इस नतीजे के साथ ही सेनेगल ने मिस्र के खिलाफ अपनी बढ़त बरकरार रखी। ‘तेरांगा लायंस’ ने 2022 के एएफकॉन फाइनल और 2022 फीफा वर्ल्ड कप प्ले-ऑफ में भी मिस्र को हराया था। दोनों मुकाबलों का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ था। यह सेनेगल की एएफकॉन फाइनल में चौथी उपस्थिति होगी। इससे पहले उसे 2002 में कैमरून और 2019 में अल्जीरिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2021 (2022 में आयोजित) संस्करण में उसने मिस्र को हराकर खिताब जीता था।

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मिस्र के कप्तान मोहम्मद सालाह को सेनेगल की मजबूत डिफेंस ने पूरे मैच में प्रभावी ढंग से रोके रखा। यह सलाह का पांचवां एएफकॉन था और अब तक वह दो बार उपविजेता रहकर ही खिताब के सबसे करीब पहुंचे हैं। माने ने कहा, “शुरुआत से ही हमने टीम के रूप में खेला। हमने व्यक्तिगत गलतियों और गैर-जरूरी फाउल से बचने की कोशिश की। पूरे मैच में हमने खेल को अच्छी तरह संभाला और कुल मिलाकर जीत के हकदार थे।” उन्होंने आगे कहा, “मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि सेनेगल हर बार जीते। मैं देश का सिपाही हूं और ट्रेनिंग हो या मैच, हर दिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता हूं। अफ्रीका कप ऑफ नेशंस दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगिता है, क्योंकि यहां सभी टीमें लगभग बराबर स्तर की होती हैं।”

गरमाया माहौल, फिर लौटी शांति
मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कई बार तनातनी भी देखने को मिली। सेनेगल के अनुभवी डिफेंडर कालिदू कूलिबाली को 17वें मिनट में मिस्र के स्ट्राइकर ओमर मार्मूश पर फाउल करने के लिए पीला कार्ड मिला। यह उनका लगातार दूसरे मैच में दूसरा येलो कार्ड था, जिसके चलते वह रबात में होने वाले फाइनल में नहीं खेल पाएंगे। हालांकि इससे भी बुरी खबर यह रही कि छह मिनट बाद कूलिबाली चोटिल हो गए और उन्हें मामादू सार से बदलना पड़ा।

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पहले हाफ में सेनेगल ने आक्रामक खेल दिखाया, लेकिन मिस्र के 37 वर्षीय गोलकीपर मोहम्मद एल-शेनावी को गंभीर चुनौती नहीं दे सका। हाफ टाइम से ठीक पहले दोनों टीमों के कोच और बेंच के खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस और हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके बाद रेफरी के हस्तक्षेप से हालात सामान्य हुए।

दूसरे हाफ में भी मैच का रुख ज्यादा नहीं बदला। मिस्र ने रक्षात्मक रणनीति अपनाए रखी और सेनेगल को गेंद पर नियंत्रण करने दिया। लेकिन आखिरकार 78वें मिनट में सेनेगल के दबाव का फल मिला। कामारा के लंबी दूरी के शॉट को डिफ्लेक्शन मिला, गेंद माने के पास पहुंची और उनके निचले शॉट ने एल-शेनावी को छकाते हुए जाल में रास्ता बना लिया। अब सेनेगल की नजरें फाइनल पर टिकी हैं, जहां वह इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगा।