30 साल बाद रूस का ‘समुद्री दैत्य’ सक्रिय, Admiral Nakhimov की ताकत से बढ़ी अमेरिका की चिंता

मॉस्को 
समंदर के रास्ते एक ऐसी खौफनाक खबर आ रही है, जिसने अमेरिकी जैसे सुपरपावर की रातों की नींद उड़ा दी है. रूस ने करीब 30 साल बाद अपने एक ‘दैत्य’ को समंदर में उतार दिया है, जो अकेले ही अमेरिकी नेवी के पूरे बेड़े को पलक झपकते ही तबाह कर सकता है. रूस ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जंगी जहाज ‘एडमिरल नाखिमोव’ को अपने फाइनल सी-ट्रायल के लिए रवाना कर दिया है. समंदर का ये सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकेंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा!

समंदर में लौटा पुतिन का 28,000 टन का महादानव!
रूस का ये कीरोव-क्लास क्रूजर (Kirov-class cruiser) कोई आम जहाज नहीं है. ये दुनिया का इकलौता और सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर्ड कॉम्बैट शिप है. इसका वजन करीब 28,000 टन है. आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ये अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न ‘अर्ली बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर’ (Arleigh Burke-class destroyers) जहाजों से भी बड़ा और भारी है। 

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सोवियत संघ के जमाने का ये दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका हुआ था लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में ये अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। 

रूस की 176 मिसाइलों का जाल, जिरकॉन काल!
इस महाविनाशक जहाज के अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता. इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं. इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का नेवल वर्जन तैनात है, जो जमीन पर मौजूद S-400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है। 

इसके अलावा, बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ‘जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें’ (Zircon Hypersonic Cruise Missile) भरी गई हैं. ये मिसाइल साउंड की रफ्तार से 9 गुना तेजी (Mach 9) से उड़ती है और 1,000 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को संभलने का एक सेकेंड का मौका भी नहीं देती। 

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रूस का ‘तख्त’ और बदलती कूटनीति का दांव
सेवेर्नोए डिजाइन ब्यूरो के सीईओ आंद्रेई द्याचकोव के मुताबिक, इस जहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि ये आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है. हालांकि, रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था। 

यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वां जहाज ‘प्योत्र वेलिकी’ को समय से पहले ही रिटायर करना पड़ा, क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था. सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस ने कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया है, इसलिए अपनी धाक जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमोव को चमकाने में झोंक दी। 

रूस धोएगा पुराने घाव
साल 2022 में यूक्रेन के मामूली मिसाइल हमले में रूस का ‘मोस्कवा’ जहाज डूब गया था, जिससे रूसी नौसेना की साख पर बट्टा लगा था. इसके बाद रूस ने अपना पूरा ध्यान गुपचुप तरीके से हमला करने वाली यासेन-एम क्लास पनडुब्बियों पर लगा दिया था. अब एडमिरल नाखिमोव को सीधे रूस के आर्कटिक बेड़े में शामिल किया जा रहा है। 

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दरअसल, अमेरिका और नाटो (NATO) देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में रूस का ये न्यूक्लियर पावर्ड दैत्य समंदर के उस बेहद ठंडे रास्ते की पहरेदारी करेगा और अमेरिका को उसकी हद में रहने की सख्त चेतावनी देगा।