Apple का बड़ा दावा: ऐप स्टोर पर 18 हजार करोड़ रुपये की फ्रॉड डील्स ब्लॉक

ऐपल ने एक बड़ा दावा किया है और बताया है कि उसने बीते एक साल में करोड़ों रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया है और लोगों की मेहनत की कमाई को ठगे जाने से बचाया है. ये जानकारी ऐपल न्यूजरूम पर शेयर की है.

ऐप स्टोर ने ट्रांजैक्शन में 2.22 बिलियन डॉलर (करीब 18 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा की धोखाधड़ी को रोका है. कंपनी ने बीते छह साल में 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के फ्रॉड को रोकने में सफलता हासिल की है.

हर सप्ताह करोड़ों विजिटर्स आते हैं
ऐपल ने बताया है कि 175 देशों के ऐप स्टोर पर हर सप्ताह करीब 85 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए ऐपल का कहना है कि वह स्कैम, खतरनाक ऐप्स, फर्जी रिव्यू और पेमेंट फ्रॉड पकड़ने के लिए रिव्यू टीम और एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम का यूज करते हैं.

2025 में आए 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन
ने बताया ह कि ऐप रिव्यू टीम ने साल 2025 में 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन प्रोसेस किए और 3 लाख नए डेवलपर्स को ऑनबोर्ड किया है. फिर ऐप स्टोर गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर करीब 20 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन रिजेक्ट किए हैं. इनमें 12 नए ऐप्स और 8 लाख ऐप अपडेट भी शामिल रहे हैं.

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रिव्यू टीम में इंसान और AI करते हैं काम
कंपनी ने आगे बताया है कि उनके रिव्यू टीम में इंसानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड सिस्टम भी काम करता है. ये सिस्टम फास्ट तरीके से खतरनाक ऐप्स की पहचान करता है और फिर उनको ब्लॉक करने में मदद करता है.

कई ऐप ने बाद में बदला अपना नेचर
ऐपल ने रिपोर्ट में बताया है कि 59 हजार ऐसे ऐप्स भी रिमूव किए जा चुके हैं, जो शुरुआत में गेम या सामान्य यूटिलिटी के रूप में मंजूर किए थे. बाद में उनको फ्रॉड प्लेटफॉर्म में बदल दिया गया.  

लाखों अकाउंट्स को किया जा चुका है बंद
अमेरिका कंपनी ने बताया है कि कई साइबर ठग बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट की मदद से ऐप रैंकिंग में हेरफेर, स्पैम और नकली रिव्यू पोस्ट करने की कोशिश करते हैं. इसको लेकर कंपनी बता चुकी है कि वह साल 2025 में 1.1 बिलियन फर्जी अकाउंट बनाने की कोशिश को ब्लॉक कर चुकी है.

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बच्चों की सेफ्टी वाले नियम तोड़े गए
Apple ने ये भी बताया है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ने पर Kids कैटेगरी के 5 हजार से ज्यादा ऐप्स को रिजेक्ट किया जा चुका है. पहले ऐप्स ने स्क्रीन टाइम और आस्क टू बाय जैसे पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का भी जिक्र किया, फिर इनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी और शॉपिंग पर नजर रखते हैं.