JJohar36garh News|नकली पेट्रोल-डीजल की कहानी में अब तक आपने पढ़ा था कि पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा है लेकिन इसकी कहानी पढक़र आप हैरान हो जाएंगे। आरोपियों के सिर पर मुनाफा कमाने का भूत इस कदर सवार था कि उन्होंने केमिकल से मिलावट शुरू कर दी। कैसे और किस तरह बनाते थे और क्या क्या मिलाया जाता था। कितना मुनाफा होता था और चार साल में अब तक कितने रुपए कमाए। नकली पेट्रोल बनने से खपाने तक की पूरी कहानी-
दरअसल इंदौर की किशनगंज पुलिस ने पेट्रोल पम्प के ग्राउण्ड टेंक में अनलोड हो रहे टेंकर क्रमांक एमपी 09 एचजे 9027 से अनलोडिंग रूकवा कर टेंकर के चारो कम्पार्टमेंट चेक किए। चालक सुरेश पिता श्यामलाल कुशवाह से पूछताछ की तो उसने मिलावट की बात स्वीकार की। पुलिस ने सैंपल के लिए संबंधित विभाग को सूचना दी। पुलिस ने आरोपी सुरेश पिता श्यामलाल कुशवाहा, चंद्रप्रकाश पिता चिंतामन पांडे, विजय कुमार मूंदड़ा और राकेश अग्रवाल पिता ताराचन्द्र अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया।
शातिर मिलावटखोरों ने मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में यह काम किया और केमिकल की मदद से पेट्रोल बनाया। पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 40 रुपए का मुनाफा इनको होता था। डीजल में भी ऐसा ही करते थे। शासन को भी करोड़ों का चूना लगाया है। अब पुलिस सच उगलवा रही है। यह बात सामने आई है कि पेट्रोल डीजल के लगातार बढ़ते दामों के चलते मुनाफे के लिए यह सब करते थे।
चालक से पूछताछ के बाद पुलिस शिवम इंडस्ट्रीज सेक्टर-3 पीथमपुर पहुंची। इंडस्ट्रीज में मौजूद ऑपरेटर चन्द्रप्रकाश पांडे पिता चिंतामन पांडे निवासी ग्राम उदयपुर डीपी थाना खुटहन जिला जोनपुर को हिरासत में लिया। पूछताछ की तो बताया कि शिवम इंडस्ट्रीज के मालिक राकेश अग्रवाल निवासी इंदौर के कहने पर उसने विजय मूंदड़ा के भारत पेट्रोल पम्प के टैंकर ड्रायवर सुरेश कुशवाह को शिवम इंडस्ट्रीज के कारखाने में पेट्रोल और डीजल जैसे दिखने वाले और काम करने वाले केमिकल हाईड्रो कार्बन को उसके टैंकर में कारखाने से लोड किया था।
शिवम इंडस्ट्रीज में मुम्बई और हजीरा से फ्यूल ऑईल, मिक्सड हैक्जिन, सी 09, पेन्टेन और रबर प्रोसेस ऑइल खरीदकर मंगवाए जाते हैं। इन सभी हाइड्रो कार्बन को अलग-अलग अनुपात में मिक्सिंग मशीन में मिक्स कर ऐसा मिश्रण बनाते हैं जो बिल्कुल पेट्रोल और डीजल की तरह दिखता है और पेट्रोल और डीजल की तरह काम भी करता है।
मिक्सिंग के बाद जो प्रोडक्ट बतौर पेट्रोल प्रयोग होता है उसको शिवम इडस्ट्रीज की तरफ से लो फ्लेस ऑइल कहकर बेचा जाता है और डीजल की जगह प्रयोग हो सकने वाला मिक्सचर रबर प्रोसेस ऑइल कहलाता है। इसके अलावा पेस्टिसाइड कंपनियों को काम आने वाला एक मिक्सचर मिक्स सी 09 के नाम से भी बनता है। फैक्टरी की तलाशी लेने पर हजारो लीटर क्षमता के दर्जन भर से अधिक टेंक जमीन के ऊपर व जमीन के भीतर गड़े थे। पांच टेंक अलग-अलग हाइड्रोकार्बन से भरे होना पाए गए। अधिकांशत: खाली थे।
शिवम इंडस्ट्रीज पीथमपुर के मालिक ने इसका लायसेंस परमिट यह बताकर लिया है कि उपरोक्त मिक्सचर कंस्ट्रक्शन व मेन्यूफेक्चरिंग यूनिट के बायलर गर्म करने और फर्निस फ्यूल के रूप में बेचा जाएगा। लेकिन हकीकत कुछ और निकली। पेट्रोल व डीजल के बढ़े हुए दामों के कारण अधिक मुनाफा कमाने के लिए विजय मूंदड़ा नामक पेट्रोल पंप मालिक और अन्य पेट्रोल पंप संचालकों से मिलीभगत कर उनके पेट्रोल पंप से आम ग्राहकों को पेट्रोल व डीजल की जगह मिलावट वाले मिक्सचर को बेचते हैं।
मुनाफा कितना कमाते थे इसे इसी से समझा जा सकता है कि नकली पेट्रोल-डीजल बेचकर आरोपी करोड़ों के मालिक बन गए। पता चला है कि आरोपी मिलावटी पेट्रोल पर 40 और मिलावटी डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर का मुनाफा अर्जित करते थे। हर महीने एक लाख लीटर केमिकल मिलाकर पेट्रोल पंप से पेट्रोल डीजल बेचते थे। मिलावट का यह काम एक दो नहीं बल्कि चार सालों से चल रहा था। आरोपी पंप मालिक और इंडस्ट्री मालिक ने लाखों रुपए के मुनाफा कमाया। पेट्रल डीजल के दाम बढ़े तो उनका लालच बढ़ गया और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में मिलावट का धंधा शुरू कर दिया।