दिल्ली में स्टॉक मार्केट निवेश के नाम पर 17.1 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने 3 जालसाज पकड़े

बाहरी दिल्ली

स्टॉक मार्केट निवेश के नाम पर 17.1 लाख रुपये की ठगी करने वाले तीन आरोपितों को उत्तर-पश्चिमी जिला साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। वहीं, इस मामले में एक महिला आरोपित को पाबंद किया है। इनके कब्जे से अपराध में इस्तेमाल तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान विनोद नगर निवासी इंदरजीत, पवन और गाजियाबाद के बालाजी विहार निवासी गौरव त्यागी के रूप में हुई है। महिला की पहचान महिमा शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिमा शर्मा आरोपित इंदरजीत के साथ संयुक्त खाता धारक थी, लेकिन अधिकृत हस्ताक्षर कर्ता नहीं थी। इसलिए उसे पाबंद किया गया है।

जिला के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि आरोपितों के बैंक खातों के खिलाफ नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 17 शिकायतें दर्ज हैं। शालीमार बाग निवासी योगेश कुमार किराना की दुकान चलाते हैं। उन्होंने 28 जनवरी में साइबर सेल में ठगी की शिकायत की। जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें एक वॉट्सएप समूह में जोड़ा गया, जहां ठगों ने स्टॉक मार्केट निवेश में ऊंचे रिटर्न का लालच दिया।

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कमीशन के बदले ठगों को दिया बैंक खाता

उन्होंने 17.10 लाख रुपये निवेश किए। लाभ होने पर जब पैसे निकालने की कोशिश की तो जालसाजों ने इसके एवज में अतिरिक्त राशि जमा करने के लिए कहा। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने मामला दर्ज कर निरीक्षक दिनेश दहिया के नेतृत्व में मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम को इंदरजीत के फर्म के खाते में ट्रांसफर किया गया था।

पुलिस ने साक्ष्य मिलने पर इंदरजीत को गिरफ्तार कर लिया। उसने बताया कि कमीशन के बदले में उसने फर्म का चालू खाता साइबर ठग गिरोह को उपलब्ध कराया था। ठगी की रकम प्राप्त करने के बाद उसने पैसे को गेमिंग एप एवं अन्य डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से आगे ट्रांसफर किया। पुलिस ने उसके निशानदेही पर अन्य आरोपितों को पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वह संगठित गैंग का हिस्सा थे, जो ठगी करते थे। इंदरजीत कमीशन के बदले अपना बैंक खाता गिरोह को उपलब्ध कराया। पवन कुमार बैंक खातों की व्यवस्था कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता था, जबकि गौरव त्यागी संचालन एवं समन्वय में सहयोग करता था।

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गिरोह वॉट्सएप निवेश समूहों एवं फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफार्म के जरिए पीड़ितों को फंसाता था। ठगी की रकम म्यूल खातों में डालकर गेमिंग एप व अन्य डिजिटल माध्यमों से तुरंत आगे भेज देता था। बाद में सक्रिय सदस्यों को उनकी भूमिका के मुताबिक कमीशन दिया जाता था। पुलिस अब इनसे पूछताछ कर आगे की कार्रवाई कर रही है।