यूपी में बिजली महंगी, 10% फ्यूल सरचार्ज से उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ

 लखनऊ

ईरान-इजराइल के युद्ध को लेकर पेट्रोल और डीजल के दामों की बढ़ोत्तरी के बाद अब महंगाई का असर बिजली पर भी पड़ गया है। यूपी में बिजली महंगी हो गई है। इससे उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड बिजली बिल में 10 प्रतिशत एक्स्ट्रा चार्ज लगाने का फैसला किया है। ये चार्ज जून में आने वाले बिजली बिल में जुड़कर आएगा। इससे यूपी के तीन करोड़ से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं की जेब ढीली होगी। यानी अब बिजली उपभोक्ताओं को 10 फीसदी अतिरिक्त पैसा देना होगा। अगर आपका 100 रुपये का बिल आएगा तो उस पर 10 रुपये ज्यादा देने होंगे।

सूत्रों के अनुसार जुलाई महीने में भी इसी प्रकार का 10 प्रतिशत अधिभार वसूला जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरक्ति आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। प्रदेश में लगभग 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं और इस निर्णय का सीधा असर घरेलू, व्यावसायिक तथा अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष तथा राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि फरवरी 2026 में भी 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी, बिजली संकट, महंगाई तथा पेट्रोल-डीजल और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच बिजली दरों में यह अतिरिक्त वृद्धि आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी साबित होगी।

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1610 करोड़ रुपये का डाला गया अतिरिक्त बोझ
वर्मा ने दावा किया कि विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) के टैरिफ आदेश में स्वीकृत वास्तविक वद्यिुत क्रय लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि मार्च 2026 में बिजली खरीद की कीमत लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट दर्शाकर उपभोक्ताओं पर करीब 1,610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया है। उन्होंने मांग की कि मार्च 2026 में महंगी बिजली किन निजी विद्युत उत्पादक कंपनियों से खरीदी गई और किन परिस्थितियों में खरीदी गई, इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि मार्च माह के फ्यूल सरचार्ज में पूर्व अवधि के लगभग 1,400 करोड़ रुपये के दावों को भी शामिल किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार बढ़ा है।

बिजली वृद्धि को रोकने की मांग
उपभोक्ता परिषद ने यह भी दावा किया कि प्रदेश की बिजली कंपनियों के पास पहले से ही 51,000 करोड़ रुपये से अधिक का उपभोक्ता अधिशेष (कंज्यूमर सरप्लस) उपलब्ध है। ऐसे में अतिरिक्त अधिभार लगाने से पहले मामले को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा जाना चाहिए था। परिषद ने इस मुद्दे को तत्काल यूपीईआरसी के समक्ष उठाने तथा फ्यूल सरचार्ज संबंधी नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग करने का निर्णय लिया है। साथ ही मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से फरवरी एवं मार्च 2026 के फ्यूल सरचार्ज के आधार पर की गई 10 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल रोकने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।

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मुकदमों में जनता का पैसा नहीं इस्तेमाल कर सकेगा पावर कॉरपोरेशन
अब पावर कॉरपोरेशन जनता के पैसों से जनता के खिलाफ मुकदमा नहीं लड़ सकेगा। पावर कॉरपोरेशन अब तक इसे भी खर्च में दिखाकर इसके एवज में बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखता था। कॉरपोरेशन को अब मुकदमों का खर्च अपने लाभ में से करना होगा। टैरिफ आदेश में नियामक आयोग इसकी व्यवस्था देगा। हालत तो यह है कि पावर कारपोरेशन और एनपीसीएल ने कुल मिलाकर 46 करोड़ रुपये मुकदमों पर खर्च कर दिए औरखातों में इसका बोझ जनता पर डालने के मकसद से घाटे के मद में जोड़ दिया। राज्य में बीते छह साल से बिजली की दरें नहीं बढ़ी हैं। नोएडा पावर कंपनी का लाइसेंस सरेंडर करने के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। इसमें पावर कॉरपोरेशन और एनपीसीएल दोनों वादी हैं। बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के बकाया रकम को भी चुनौती दी गई है। तमाम ऐसे मामले भी हैं, जिनमें उपभोक्ताओं के पक्ष में आदेश आने के बाद पावर कॉरपोरेशन या बिजली कंपनियां उनके खिलाफ भी मुकदमे लड़ रही हैं।

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पिछले साल पावर कॉरपोरेशन ने मुकदमों पर खर्च किए थे 21 करोड़
बीते साल सिर्फ मुकदमों पर पावर कॉरपोरेशन ने 21 करोड़ जबकि एनपीसीएल ने 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह रकम उपभोक्ताओं से लिए जा रहे बिजली बिलों से एकत्रित पैसों से खर्च की जा रही है। इस बार जब बिजली की नई दरों पर चर्चा हो रही थी तब मुकदमों में खर्च की रकम को घाटा दिखाने पर आपत्ति दर्ज की गई। इसमें कहा गया कि पावर कॉरपोरेशन और अन्य बिजली कंपनियां जनता के खिलाफ ही मुकदमे लड़ रही हैं और इसमें आए खर्च को घाटे में दिखा कर बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखना गलत है। सूत्र बताते हैं कि नियामक आयोग इस संबंध में टैरिफ आदेश में व्यवस्था देगा। मुकदमों में खर्च की रकम के एवज में बिजली दरें बढ़ाने की मांग नहीं स्वीकार की जाएगी। मुकदमा लड़ना पावर कॉरपोरेशन का फैसला है, इसका खर्च वह स्वयं के स्रोतों से वहन करे।