अमरनाथ यात्रा को लेकर भक्तों का उत्साह, सीधे कश्मीर पहुंचकर पंजीकरण कराने वालों की संख्या में इजाफा

श्रीनगर,

 अमरनाथ यात्रा को लेकर बाबा बर्फानी के भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जम्मू से सुरक्षा काफिले में यात्रा शुरू करने वाले श्रद्धालुओं की तुलना में अब अधिक श्रद्धालु सीधे कश्मीर पहुंच रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से पुलिस काफिले के साथ आने वाले यात्रियों की तुलना में दोगुने से अधिक यात्री सीधे कश्मीर के दो बेस कैंप और ट्रांजिट कैंपों में ऑन स्पॉट पंजीकरण के लिए पहुंच रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए सीधे कश्मीर पहुंचने वाले यात्री, जो वहां जाकर पंजीकरण कराते हैं, ज्यादातर हवाई मार्ग से आ रहे हैं। इससे जम्मू से सड़क के रास्ते बालटाल और पहलगाम बेस कैंप जाने वाले यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, आज 2,197 यात्रियों का एक और जत्था जम्मू से दो पुलिस काफिलों में घाटी के लिए रवाना हुआ। पहला काफिला, जिसमें 39 वाहनों में 573 यात्री थे, सुबह 3:31 बजे बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। दूसरा काफिला, जिसमें 62 वाहनों में 1,624 यात्री थे, सुबह 4:01 बजे पहलगाम बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।

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अमरनाथ यात्रा के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यह यात्रा पहलगाम हमले के बाद हो रही है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।

180 अतिरिक्त सीएपीएफ कंपनियों को सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत बढ़ाने के लिए लाया गया है। जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से गुफा मंदिर तक के पूरे रास्ते और दोनों आधार शिविरों के रास्ते में सभी पारगमन शिविरों को सुरक्षा बलों ने सुरक्षित कर लिया है। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस की मौजूदा ताकत को बढ़ाने के लिए सीएपीएफ की 180 अतिरिक्त कंपनियां लाई गई हैं। पूरे मार्ग को सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है।

पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले लोग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुफा मंदिर तक पहुंचते हैं और 46 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हैं।

तीर्थयात्रियों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं। वहीं, छोटे बालटाल मार्ग का उपयोग करने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और यात्रा पूरी करने के बाद उसी दिन आधार शिविर लौटना पड़ता है। सुरक्षा कारणों से इस वर्ष यात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है।

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अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई और 38 दिनों के बाद 9 अगस्त को समाप्त होगी, जो श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन का दिन है।

श्री अमरनाथ जी यात्रा भक्तों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है, क्योंकि किंवदंती है कि भगवान शिव ने इस गुफा के अंदर माता पार्वती को शाश्वत जीवन और अमरता के रहस्य बताए थे।