भारत से माफी और मुनीर पर सख्ती की मांग—पूर्व पेंटागन अधिकारी ने ट्रंप प्रशासन को घेरा

वाशिंगटन 
अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में पिछले लगभग एक साल में काफी बदलाव आया है। ट्रंप प्रशासन के रवैये ने भारत में लोगों को बहुत नाराज किया है। अब इस पूरे घटनाक्रम पर पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा है कि अमेरिका ने जो दुर्व्यवहार भारत के साथ किया है उसको लेकर माफी मांगनी चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी चीफ को गिरफ्तार करने की भी मांग करते हुए कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाला देश घोषित करना चाहिए।
 
एएनआई से बात करते हुए माइकल रुबिन ने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान का साथ देने में कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका का पाकिस्तान का रणनीतिक रूप से अपनाने के फैसले का कोई तर्क नहीं है। पाकिस्तान को आतंकवाद का राज्य प्रायोजक घोषित किया जाना चाहिए। अगर पाकिस्तानी सेना का प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका में आता है, तो उसका सम्मान नहीं करना चाहिए, उसे गिरफ्तार करके जेल में डाल देना चाहिए।

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भारत से माफी मांगे अमेरिका: रुबिन
जॉर्ज बुश के कार्यकाल में पेंटागन में बड़ी भूमिका निभाने वाले रुबिन ने कहा कि अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने पिछले एक साल में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ काफी दुर्व्यवहार किया है। इसे लेकर उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें पर्दे के पीछे शांत कूटनीति की जरूरत है, और शायद किसी समय, संयुक्त राज्य को इस बात पर खुलकर माफी मांगनी चाहिए कि हमने भारत के साथ कैसे व्यवहार किया। मुझे मालूम है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप माफी मांगना पसंद नहीं करते, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया के तमाम लोकतांत्रिक देशों के हित किसी एक व्यक्ति के अहंकार से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।"

अमेरिका-भारत तनाव
जनवरी 2025 में ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद ऐसा लगा था कि दोनों देशों के संबंधों में काफी सुगमता आ जाएगी। लेकिन धीरे-धीरे चीजें बिगड़ना शुरू हो गईं। मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद अमेरिका ने खुलकर पाकिस्तान का पक्ष लेना शुरू कर दिया। इसके बाद भारत का रुख भी बदल गया। अमेरिका ने आसिम मुनीर को वाइट हाउस का न्यौता दिया और पाकिस्तान के साथ व्यापार करने की कसमें भी खाईं, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए अड़ा रहा।

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अमेरिका की तरफ से लगातार भारत को चेतावनी देते हुए रूसी तेल खरीद को बंद करने के लिए कहा जाता रहा, लेकिन भारत ने अपने हिसाब से चीजें करनी शुरू की। इसके बाद ट्रंप ने भारत के ऊपर टैरिफ लगा दिए। भारत ने इसका विरोध किया, लेकिन रूस के साथ अपने संबंधों में कोई गिरावट नहीं होने दी।