Google की महत्वाकांक्षी योजना: अंतरिक्ष में बनेगा डेटा सेंटर

नई दिल्ली

दुनियाभर में AI कंपनियां अपने डेटा सेंटर्स को लेकर काम कर रही हैं. कोई धरती पर या फिर कोई समंदर के अंदर डेटा सेंटर बना रहा है. इस दिशा में Google एक कदम आगे निकलने की कोशिश कर रहा है. अब गूगल अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम को बनाने जा रहा है, जिसको आगे डेटा सेंटर के रूप में भी यूज किया जा सकेगा. इसको लेकर Google ने एक सफल परीक्षण किया है और सीईओ सुंदर पिचाई ने पोस्ट करके इसकी जानकारी भी दी है. 

सुंदर पिचाई ने बताया कि गूगल ने लो अर्थ ऑर्बिट में पाई जाने वाले रेडिएशन की कंडिशन को फॉलो करते हुए एक सफल टेस्टिंग की है. इसमें ट्रिलियम-जनरेशन टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPUs) को टेस्ट किया है.  

प्रोजेक्ट सनकैचर के लिए यह एक बड़ी सफलता है. इस प्रोजेक्ट की मदद से गूगल अपने सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक को पूरा करना चाहते है. कंपनी इसकी मदद से अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम का सेटअप लगाना चाहता है, जिसको सूरज की रोशनी से पावर मिलेगी.  

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सुंदर पिचाई ने समझाया, TPU क्या है? 

गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया कि TPU असल में खास तरह की चिप्स हैं, जिनको आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के काम को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया है. इन चिप्स की टेस्टिंग रेडिएशन एक्सपोजर के दौरान की गई और इन चिप्स पर डैमेज का कोई भी निशान नहीं दिखा है.    

सफल टेस्टिंग से इस बात के पॉजिटिव साइन मिलते हैं कि गूगल का एडवांस्ड हार्डवेयर सिस्टम, आउटर स्पेस के खतरनाक एनवायरमेंट का भी सामना करना सकेगा. बताते चलें कि आउटर स्पेस में हाई रेडिशन और तापमान तेजी से बदलता है. 

इस प्रोजेक्ट का मकसद सूर्य से आने वाली ऊर्जा को पावर में बदलने का है. इसके लिए सोलर पावर पैनल्स का यूज किया जा सकता है. इस पावर को पृथ्वी के लो ओर्बिट में स्थापित लार्ज स्केल AI कंप्यूटर सिस्टम में ट्रांसफर किया जाएगा. 

इस प्रोजेक्ट की जरूरत क्यों पड़ी? 

दरअसल, AI मॉडल जैसे ChatGPT, Gemini, Claude आदि को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. बिजली की इस जरूरत को पूरा करने के लिए अगर कोयला, गैस या डीजल का यूज होता है तो काफी ज्यादा प्रदूषण होगा. ऐसे में कंपनी इसको सोलर पावर से चलाना चाहती है, जिसके लिए लो अर्थ ऑर्बिट में पूरा सेटअप लगाने का प्लान बनाया है.  

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कहां से मिली है प्रेरणा 

गूगल को इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा मूनशूट प्रोजेक्ट से मिली है, जिसे अब अल्फाबेट की X डिविजन के रूप में जाना जाता है. इस डिविजन का काम अनोखी टेक्नोलॉजी तैयार करना है, जो अधिकतर लोगों की सोच से परे होती हैं.

2027 की दी है डेडलाइन 

सुंदर पिचाई ने बताया कि अगर सब कुछ ठीक चला तो 2027 की शुरुआत तक Planet कंपनी के साथ मिलकर अपने दो प्रोटोटाइप सेटेलाइट लॉन्च करेगी. इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे भी लेकर जाएंगे.