राज्यपाल ने ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल को किया बर्खास्त, नई सरकार के गठन के लिए संवैधानिक प्रक्रिया रहेगी जारी

मता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के बाद राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल बर्खास्त कर दिया. बंगाल चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने ये फैसला लिया है.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार (6 मई 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ‘जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश’ है. साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया|

 

बंगाल में आखिरकार राज्यपाल को एक्शन लेना पड़ गया है. 7 मई को हुए विधानसभा 2021 के कार्यकाल के बाद राज्यपाल ने राज्य के ममता सरकार को बर्खास्त कर दिया है. इसी के साथ राज्य का मंत्रिमंडल भी भंग हो गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी इस पद हैं या नहीं. 4 मई को 293 विधानसभा सीट के आए नतीजों में टीएमसी सरकार को करारी हार का सामना करना पड़ा है. यहां की जनता ने अपना जनादेश बीजेपी को सौंपा है.

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क्या राज्यपाल के मंत्रिमंडल बर्खास्त के बाद पर रहेंगी ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद इस्तीफा ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से नहीं दिया. इसके बाद राज्यपाल ने गुरुवार को मंत्रिमंडल को ही बर्खास्त कर दिया. इस फैसले के साथ ही अब वह मुख्यमंत्री पद पर नहीं है. राज्यपाल ने यह सख्त कदम ममता बनर्जी के अड़ियल रवैये को देखकर उठाया है.

 

वहीं, संवैधानिक प्रोटोकॉल का पालन न करने और चुनाव के बाद सरकार कार्यकाल समाप्त होने के कारण राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने मंत्रिमंडल को आधिकारिक तौर पर बर्खास्त कर दिया. इसी के साथ अब नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के चयन के लिए आगे की संवैधानिक प्रक्रिया जारी रहेगी.

 

राज्यपाल को अपनी शक्ति का उपयोग करने की शक्ति संविधान देता है
राज्यपाल को शक्ति भारत का संविधान आर्टिकल 164 के तहत देता है. इसके तहत मुख्यमंत्री और मंत्री राज्यपाल के प्लेजर ऑफ द गवर्नर पद का धारण करते हैं. चुनाव नतीजों में चूंकि टीएमसी बहुमत खो चुकी है. इसी अधिकार का उपयोग करते हुए राज्यपाल ने यह फैसला लिया है. वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा का 5 साल का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. विधानसभा से जुड़े आर्टिकल 172 के तहत 8 मई से विधानसभा स्वत: ही भंग मानी जाती. ऐसे में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मनाही के बाद राज्यपाल अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए बाध्य होते हैं.

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संविधान के हिसाब से विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और मौजूदा विधानसभा 8 में 2021 से 7 में 2026 तक अस्तित्व में रही. नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है लिहाजा पुरानी विधानसभा को भंग कर दिया गया