क्या आजादी के बरसों बाद भी वंचित वर्ग को आजादी मिल पाई है : संजीत बर्मन

देशभर में हो रहे जाति अत्याचार के खिलाफ युवा निर्वस्त्र होकर राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा स्थल के पास प्रदर्शन करेंगे. 18 जुलाई को प्रदेशभर से युवा रायपुर पहुंचेगे. प्रदर्शन को लेकर समाजिक कार्यकर्ता संजीत बर्मन ने आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है.

प्रदर्शन करने वाले संजीत का कहना है उनके आरक्षित वर्ग के जनप्रतिनिधि और पढ़े-लिखे अधिकारी कर्मचारी अपने वर्ग के साथ हो रहे अन्याय अत्याचार और प्रशासनिक दमन के खिलाफ मुंह खोलने के बजाए चुप्पी साध कर पेटखोर रहते हुए आरक्षण का लाभ उठाते रहना चाहते हैं. लेकिन अब हमें अत्याचार की घटनाओं को सुनते हुए देखते हुए जीवन यापन करना सहन नहीं हो रहा है. हम नहीं चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी अपने जीवनकाल में जातिगत प्रताड़ना और अत्याचार झेलते रहे.

बता दें कि संजीत बर्मन पेशे से शासकीय स्कूल में शिक्षक रह चुके है. उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर अपना जीवन समाज और मानवता के लिए समर्पित कर दिया है. संजीत कहते है अगर गरिमामय जीवन और समान नागरिक अधिकार के साथ जीने के लिए धरना-प्रदर्शन और रैली-आंदोलन करना अगर हमारे जाति वर्ग के हिस्से में परंपरा बन गया है तो हम इस परंपरा को खत्म करना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि उनकी जाति ऐसी है कि पुलिस उनकी सुनती नहीं है, प्रशासन उन पर यकीन करती नहीं है और तो और उनके राजनीतिक वोट को बिकाऊ समझा जाता है हमारे समाज के सामाजिक ठेकेदारों को रुपए और पद के लालच देकर वोट प्रभावित किया जाता है. पदलोलुपता के वजह से सामाजिक ठेकेदारों की आवाज सत्ता के सामने दबी रहती है और इसलिए सरकार हमारे अस्तित्व को स्वीकार करती नहीं है.

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संजीत प्रदेश और देश मे हो रहे घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहते है हमारी गिनती जनगणना के समय हिंदू धर्म में गिना जाता है, लेकिन जब तक हिंदू के सामने मुस्लिम न हो तब तक हिंदू धर्म हमें अपना मानती नहीं है. हमारे वर्ग के ऊपर अत्याचार करने वाले एवं हमारे आरक्षण के खिलाफ खड़ा होते हमने सदैव हिंदू धर्मी को ही देखा है. जब हमारे लोगों पर कोई हिंदू धर्मी अत्याचार करता है तब कोई दूसरा हिंदू धर्मी को हमारे पक्ष में खड़ा होते कभी नहीं देखा है.

उन्होंने कहा कि हम भारत का संविधान पर विश्वास करते हुए पुलिस से निवेदन किए, प्रशासन को आवेदन दिए, सरकार से गुहार लगाए और न्यायपालिका से न्याय मिलने की उम्मीद लगाए रहे. अफसोस हर जगह से हमें निराशा हाथ लगी. अब हमें एहसास होने लगा है कि हमें इस भारत देश में दोयम दर्जे के नागरिक समझा जाने लगा है.

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छत्तीसगढ़ के पेरियार कहे जाने वाले संजीत बर्मन ने केंद्र और राज्य सरकार की नीति पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा सरकार में बैठे लोग हमारे सारे संवैधानिक अधिकार को धीरे-धीरे निलंबित करने में लगे हुए है और मनुस्मृति के अनुसार हम पर शासन करने का योजना बनाई जा रही है. जिस मनुस्मृति को अमानवीय बता डॉक्टर अम्बेडकर ने सार्वजनिक तौर पर जला दिया था उसे अब धीरे-धीरे सरकार कानून के रास्ते थोपने की कोशिश कर रही है.

इस प्रदर्शन में संजीत बर्मन, मनीष गायकवाड़, विनय कौशल, पंकज भास्कर सहित अन्य युवा शामिल हो रहे है. प्रदर्शनकारी कहते है कि हम मजबूर हैं, हमें भारतीय नागरिक साबित करने के लिए नंगा (निर्वस्त्र) होकर प्रदर्शन करने की आवश्यकता हो गई है. हमारा कदम अपने शोषित समाज के स्वाभिमान के लिए है.

सामाजिक कार्यकर्ता संजीत ने कहा कि क्या आजादी के बरसों बाद भी वंचित वर्ग को आजादी मिल पाई है. इस मुद्दे पर बहस बहुत हुए है. अंततः यह समझ आता है कि इस आजाद भारत मे आज भी वंचित तपके को आजादी से जीने में बहुत तरह की समस्याएं है. उनके उध्धार के लिए बने कानून जाति के दीवार को तोड़ने में नाकाम साबित रही है. देश का बहुसंख्यक वर्ग इस व्यवस्था से आहत है. निश्चितरूप से युवाओं का यह प्रदर्शन देश की खोखली आजादी के पोल खोलने वाली है.(Ajency)

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