US-Iran Deal का असर: 2 महीने बाद खुला होर्मुज मार्ग, फिर शुरू हुआ ईरानी तेल का निर्यात

नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट में जंग खत्म हो गई है और अमेरिका-ईरान में शांति समझौता हो गया है. इसके तहत जहां ईरान होर्मुज खोलने को राजी हो गया, तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की तेल गैस जरूरत को पूरा करने के लिए अहम इस जरूरी समुद्री रूट से अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी हटा दी. इसका असर भी देखने को मिल रहा है, करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद अब जहाजों में भरकर ईरानी कच्चा तेल निकलने लगा है। 

4.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल निकला
टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी (NITC) के दो VLCC सुपरटैंकर – DIONA (9569695) और HERO2 (9362073) तेल लेकर निकले हैं और इनमें 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल भरा हुआ है. ये सुपरटैंकर अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी वाली सीमा से बाहर निकले हैं। 

बता दें कि पिछले दो महीनों में यह ऐसा पहला एक्सपोर्ट है, जिसकी पुष्टि 15 जून, 2026 के AIS डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है. इसके बाद एक तीसरा स्वेजमैक्स (Suezmax) टैंकर 1 मिलियन बैरल तेल लेकर निकला। 

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एक टैंकर बढ़ रहा पाकिस्तान की ओर
रिपोर्ट में पोस्ट किए गए मैप में ये तेल के जहाज और STREAM अरब सागर में ओमान की खाड़ी के पास दिखाई दे रहे हैं. ये उस नाकेबंदी वाली लाइन को पार कर रहे हैं जो अप्रैल 2026 में US-ईरान टकराव के दौरान बनाई गई थी। 

मैप में ये भी देखा जा सकता है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का STREAM (9569633) पाकिस्तान के EEZ से नाकेबंदी वाली लाइन की ओर बढ़ रहा है, जहां यह जहाज ईरान में प्रवेश करने के इंतजार में पिछले 7 हफ्तों से रुका हुआ था। 

डील के बाद क्रैश हुआ कच्चा तेल 
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान में शांति समझौता होने से दुनिया ने राहत की सांस ली है. इसका सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के इस समझौते वाली डील के ऐलान के बाद से लगातार क्रैश हो रहा है. लंबे समय तक 100-110 डॉलर के आसपास रहकर दुनिया के डराने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अब 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ चुकी है। 

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil Price 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो इसके तीन महीने का लो लेवल है. वहीं दूसरी ओर WTI Crude Oil Price 76.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसके अलावा मर्बन क्रूड का भाव भी 7 फीसदी से ज्यादा फिसलकर अब 71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. तेल सस्ता होने से महंगाई का जोखिम कम हुआ है।