कश्मीर पहुंची भारतीय सेना की पहली मालगाड़ी, लौटते वक्त सेब लेकर आएगी घाटी की मिठास

श्रीनगर 

जम्मू-कश्मीर में एक ऐतिहासिक घटना हुई है. उद्धमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर भारतीय सेना की पहली विशेष मालगाड़ी सफलतापूर्वक चली. 12-13 सितंबर 2025 को यह गाड़ी बीडी बारी से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडवांस्ड विंटर स्टॉकिंग (एडब्ल्यूएस) सामान लदा था, जो सेना की इकाइयों के लिए था. यह कदम सेना की सर्दियों की तैयारी में क्रांति लाएगा.

यूएसबीआरएल क्या है और इसका महत्व?

यूएसबीआरएल भारत का एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना है, जो जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ती है. इसकी कुल लंबाई 272 किलोमीटर है. यह हिमालय के कठिन इलाके से गुजरती है. इसमें दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल चेनाब ब्रिज (359 मीटर ऊंचा) और भारत का सबसे लंबा रेल सुरंग पीर पंजाल (11.215 किमी) शामिल हैं.

यह परियोजना 2002 में शुरू हुई और जून 2025 में पूरी तरह चालू हो गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को इसकी शुरुआत की, जब वंदे भारत ट्रेन को फ्लैग ऑफ किया गया. इस रेल लिंक से कश्मीर घाटी बाकी भारत से जुड़ गई, जो सड़कों पर भूस्खलन या बाढ़ से होने वाली परेशानियों को कम करेगी.

अगस्त 2025 में पहली मालगाड़ी अनंतनाग पहुंची, जो सीमेंट ले जा रही थी. लेकिन भारतीय सेना की यह गाड़ी पहली विशेष मालगाड़ी है, जो सैन्य और सिविल उपयोग का उदाहरण है.

See also  सपा छात्र सभा ने ABVP समर्थन में किया प्रदर्शन, पुलिस के साथ हुई तीखी झड़प

सेना की पहली विशेष मालगाड़ी: क्या लाया और क्यों खास?

12-13 सितंबर 2025 को चली यह मालगाड़ी बीडी बारी (कटरा के पास) से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडब्ल्यूएस सामान लदा था, जैसे राशन, ईंधन, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें. ये सामान जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना की इकाइयों के लिए था, ताकि सर्दियों में बर्फीले हिमालयी इलाके में कोई कमी न हो.

पहले सेना सड़कों पर ट्रक से सामान भेजती थी, जो भूस्खलन या बर्फबारी से रुक जाती थी. अब रेल से तेज और सुरक्षित तरीके से स्टॉकिंग होगी. यह सेना की क्षमता विकास का हिस्सा है, जो कठिन इलाकों में ऑपरेशनल तैयारी सुनिश्चित करेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कश्मीर को राष्ट्रीय फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने का मील का पत्थर है. 

सिविल-मिलिट्री फ्यूजन: कश्मीरी सेब का निर्यात

यह गाड़ी सिर्फ सैन्य उपयोग की नहीं. वापसी में यह कश्मीरी सेब ले जाएगी, जो भारत के बाकी बाजारों में बेचे जाएंगे. यह ड्यूल-यूज लॉजिस्टिक्स का शानदार उदाहरण है. कश्मीरी किसान पहले भूस्खलन या बाढ़ से सड़कें बंद होने पर भारी नुकसान उठाते थे. अब रेल से उनका फल तेजी से बाजार पहुंचेगा, जिससे आर्थिक राहत मिलेगी.

यह कदम सेना की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका दिखाता है. सेना न सिर्फ रक्षा करती है, बल्कि कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान दे रही है. रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का सैन्य और सिविल उपयोग से क्षेत्र की लचीलापन, कनेक्टिविटी और समृद्धि बढ़ेगी. परियोजना से 5 करोड़ से ज्यादा मैन-डे रोजगार पैदा हुए हैं.

See also  UP सरकार का बड़ा कदम, 11 विरासत भवन और किले बनेंगे भव्य टूरिस्ट स्पॉट

यूएसबीआरएल के फायदे: कश्मीर के लिए नया दौर

यह रेल लिंक कश्मीर को बदल देगी. पहले कश्मीर घाटी रेल से अलग-थलग थी, लेकिन अब पैसेंजर ट्रेनें (जैसे वंदे भारत) और मालगाड़ियां चलेंगी. इससे फल, हस्तशिल्प और अन्य सामान सस्ते में बाजार पहुंचेंगे. सेना के लिए यह सर्दियों की स्टॉकिंग आसान करेगा. 

परियोजना में कई चुनौतियां थीं—जैसे हिमालय के युवा इलाके में भूगर्भीय समस्याएं. लेकिन सुरंगों में वेंटिलेशन और फायरफाइटिंग सिस्टम लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित की गई. अब कश्मीर की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.

Srinagar से रवाना हुई पहली  Rapid Cargo ट्रेन, इतने समय में तय करेगी Delhi तक का सफर

 आज श्रीनगर से पहली माल ढुलाई ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना की गई है।  कश्मीर की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए LG Manoj Sinha ने सोमवार को नौगाम रेलवे स्टेशन से कश्मीर और नई दिल्ली के बीच संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह नई पार्सल ट्रेन सेवा विशेष रूप से बागवानी उत्पादों के त्वरित परिवहन में मददगार साबित होगी और क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगी।  मैं इस पहल के लिए रेलवे का आभारी हूँ।"

See also  सरकार ने असमय बारिश से प्रभावित गेहूं पर दी राहत, पूरे प्रदेश में शिथिल मानकों के साथ होगी खरीद

उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि भौगोलिक कारणों और खराब मौसम की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग कई बार अवरुद्ध हो जाते हैं। इस बंद होने से जल्दी खराब होने वाले सामानों को नुकसान होता है। रेलवे पार्सल सेवाओं की शुरुआत इस समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़ी छलांग है।" 

 इस बीच, रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पार्सल सेवा बडगाम और आदर्श नगर, नई दिल्ली के बीच चलेगी, जिसका जम्मू के बारी ब्राह्मणा में एक निर्धारित ठहराव होगा। इस ट्रेन में 23-23 टन क्षमता वाले आठ पार्सल कोच हैं और शुरुआत में ये सेब और अखरोट ले जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि इस सुविधा से रसद व्यवस्था सुचारू होने, समय पर माल लदान और परिवहन घाटे में कमी आने की उम्मीद है। पहली ट्रेन ₹2.5 करोड़ मूल्य के फल लेकर 24 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इसी तरह की 15 कोच वाली वीपी ट्रेन जल्द ही अनंतनाग से फल, खासकर सेब ले जाने के लिए चलेगी। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल न केवल कश्मीर के लिए, बल्कि पूरे जम्मू और कश्मीर क्षेत्र और भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण है।