36 साल की शानदार सेवा के बाद भारतीय नौसेना ने सी-किंग हेलिकॉप्टर स्क्वॉड्रन को दी विदाई

नई दिल्ली

भारतीय नौसेना ने अपने सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली सी किंग एमके 42बी (Sea King Mk 42B) हेलिकॉप्टर के मुख्य स्क्वाड्रन को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया है. तीन दशकों से भी अधिक समय तक भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने वाले और नौसैनिक अभियानों की रीढ़ माने जाने वाले इस हेलिकॉप्टर को फ्लाइंग फ्रिगेट यानी उड़ता हुआ युद्धपोत के नाम से जाना जाता था।  

मुंबई स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन 'आईएनएस शिक्रा' (INS Shikra) पर तैनात आईएनएएस 330 हारपून्स स्क्वाड्रन द्वारा संचालित इस सी किंग बेड़े ने देश की 36 वर्षों तक शानदार सेवा की. अब इसे आधिकारिक तौर पर नंबर-प्लेटेड यानी निष्क्रिय कर दिया गया है। 

मुख्य स्क्वाड्रन के हटने के बाद अब नौसेना के पास केवल एक अंतिम सक्रिय सी किंग स्क्वाड्रन बचा है, जिसमें पुराने सी किंग एमके 42सी वेरिएंट के कुछ ही हेलिकॉप्टर बचे हैं, जिनका इस्तेमाल भी आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। 

See also  कॉकरोच पार्टी के संस्थापक भारत आएंगे, 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान

क्या रही सी किंग की ऐतिहासिक भूमिका?
मुख्य बेड़े की विदाई के बाद बचे हुए कुछ गिने-चुने सी किंग हेलिकॉप्टर्स का संचालन अब विशाखापत्तनम स्थित 'आईएनएस डेगा' पर तैनात आईएनएएस 350 'सारस' स्क्वॉड्रन द्वारा किया जा रहा है. इन हेलिकॉप्टरों को अब मुख्य युद्धक भूमिकाओं से हटाकर प्राथमिक रूप से खोज और बचाव अभियानों तथा विशेष नौसैनिक अभियानों के बैकअप सपोर्ट के काम में लगाया गया है। 

अपने गौरवशाली इतिहास में ब्रिटिश-निर्मित सी किंग हेलिकॉप्टरों ने समुद्र में भारत की ताकत का लोहा मनवाया था. यह अकेला ऐसा विमान था जो दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर नष्ट करने, समुद्री जहाजों पर हमला करने, चौबीसों घंटे समुद्री निगरानी रखने के साथ-साथ गंभीर चक्रवातों और आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता व बचाव कार्यों में सबसे आगे रहता था। 

बड़े युद्धपोतों पर आसानी से लैंड करने और अत्यधिक घातक हथियारों से लैस होने के कारण ही नौसैनिक इसे 'फ्लाइंग फ्रिगेट' कहते थे। 

अमेरिकी 'रोमियो' की एंट्री: एमएच-60आर सीहॉक संभालेंगे देश की कमान
सी किंग हेलिकॉप्टरों की इस विदाई का मतलब यह नहीं है कि समुद्र में भारत की नजर कमजोर होगी; बल्कि यह नौसेना के आधुनिक और अधिक घातक रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने का एक बड़ा रणनीतिक कदम है। 

See also  गृह रक्षा विभाग को तकनीकी सक्षम एवं सशक्त बनाने पर जोर, मुख्य सचिव ने की विभागीय कार्य की समीक्षा

इन बूढ़े हो चुके हेलिकॉप्टरों की जगह लेने के लिए भारत ने अमेरिका से अत्याधुनिक एमएच-60आर सीहॉक रोमियो हेलिकॉप्टरों को अपने बेड़े में शामिल करना शुरू कर दिया है. भारत ने अमेरिकी सरकार के साथ एक सरकारी सौदे के तहत कुल 24 एमएच-60आर हेलिकॉप्टरों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से 21 हेलिकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं। 

इन 21 में से 15 रोमियो हेलिकॉप्टर वर्तमान में फ्रंटलाइन युद्धपोतों के साथ पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं, जबकि तीन हेलिकॉप्टरों को अमेरिकी जमीन पर ही भारतीय पायलटों और क्रू मेंबर्स की एडवांस ट्रेनिंग के लिए रखा गया है। 

बाकी बचे हेलिकॉप्टरों में भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल जरूरी बदलाव और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद वे भी मुख्य सेना का हिस्सा बन जाएंगे। 

अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एमएच-60आर को दुनिया का सबसे आधुनिक नौसैनिक हेलिकॉप्टर माना जाता है, जो एडवांस सेंसर, एमके-54 टॉरपीडो और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलों से लैस है. इसके आने से हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों पर नजर रखना भारत के लिए बेहद आसान हो जाएगा। 

See also  अमित शाह का पंजाब दौरा तय, जानें रैली की तारीख और लोकेशन