राजस्थान विधानसभा में 49 साल बाद बड़ा बदलाव, बढ़ेगी विधायकों की संख्या

जयपुर.

राजस्थान की राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले 49 सालों से स्थिर रही विधानसभा सीटों की संख्या में अब भारी इजाफा होने की संभावना है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के अनुसार, आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद प्रदेश में विधायकों की संख्या 200 से बढ़कर 270 हो सकती है।

जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्पीकर देवनानी ने बताया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विधानसभा में 280 विधायकों के बैठने की क्षमता वाला हॉल तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में सदन में केवल 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है।

70 नई सीटें जुड़ने की संभावना
जल्द ही देश में जनगणना होने वाली है, जिसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी। राजस्थान में लगभग 70 नई सीटें जुड़ने की संभावना है। हमने भविष्य को देखते हुए स्ट्रक्चर तैयार कर लिया है, ताकि सदन छोटा न पड़े।
-वासुदेव देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष

See also  CM बोले – 2023 से ज्यादा इस बार हुआ नुकसान, हालात गंभीर

राजस्थान में सीटों का गणित: 1952 से अब तक
राजस्थान में आखिरी बार सीटों का विस्तार 1977 में हुआ था। तब से लेकर अब तक जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन सीटों की संख्या 200 पर ही टिकी रही।

वर्ष    विधानसभा चुनाव    कुल सीटें    क्या हुआ बदलाव?
1952    पहला चुनाव    160    पहली बार सीटों का निर्धारण
1957    दूसरा चुनाव    176    16 सीटों की बढ़ोतरी
1967    विधानसभा चुनाव    184    8 सीटें और बढ़ाई गईं
1977    विधानसभा चुनाव    200    आखिरी बार संख्या में वृद्धि

संसद की तर्ज पर बनेगा 'सेंट्रल हॉल'
विधानसभा परिसर को आधुनिक और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 14 करोड़ रुपए के बजट की घोषणा की है।
सेंट्रल हॉल: दिल्ली की संसद की तरह यहां भी एक भव्य सेंट्रल हॉल बनेगा।
सुविधाएं: यहां सभी दलों के विधायक एक साथ बैठकर अनौपचारिक चर्चा कर सकेंगे। साथ ही चाय, नाश्ते और भोजन की विशेष व्यवस्था होगी।

See also  UP के 558 मदरसों की जांच रुक गई, हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस भेजा

विधान परिषद हॉल का उपयोग
विधानसभा परिसर में पहले से ही विधान परिषद के लिए एक ढांचा (स्ट्रक्चर) मौजूद है। सीटों की संख्या बढ़ने पर इस हॉल को मुख्य सदन की तरह विकसित कर उपयोग में लाया जाएगा।

परिसीमन से कैसे बदलेगा सियासी नक्शा?
सीटों की संख्या बढ़ने का सीधा असर राजस्थान की राजनीति और भूगोल पर पड़ेगा। 70 नई सीटें बनने से प्रदेश के कई युवा और नए नेताओं के लिए विधानसभा पहुंचने की राह आसान होगी। परिसीमन के दौरान जनसंख्या के आधार पर कई सामान्य सीटें SC/ST के लिए आरक्षित हो सकती हैं, जबकि कुछ वर्तमान आरक्षित सीटें सामान्य हो सकती हैं। कई बड़े विधानसभा क्षेत्रों को काटकर दो हिस्सों में बांटा जाएगा, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक पकड़ में बदलाव आएगा।

अगला कदम क्या है?
परिसीमन की प्रक्रिया परिसीमन आयोग के गठन और जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद ही शुरू होगी। माना जा रहा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

See also  मौलाना तौकीर रजा ने किया सामूहिक धर्मांतरण कराने का ऐलान