आरबीआई का बड़ा कदम, भारत में प्लास्टिक नोट लाने की योजना पर विचार तेज

नई दिल्ली

 भारतीय रिजर्व बैंक देश में फटे-पुराने नोटों की समस्या को समाप्त करने और बार-बार नोट छापने पर आने वाली भारी लागत को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है।

केंद्रीय बैंक अब पारंपरिक कागजी मुद्रा के स्थान पर प्लास्टिक से बने नोट जारी करने की योजना पर विचार कर रहा है। वित्तीय बाजार और आम जनता के लिए इस बदलाव के फायदे और चुनौतियां दोनों ही काफी महत्वपूर्ण हैं।

क्या हैं प्लास्टिक नोट?
प्लास्टिक नोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक पदार्थ से तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक सूती धागे से बने कागजी नोटों की तुलना में ये बेहद लचीले, हल्के और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। मौजूदा समय में चलने वाले कागजी नोट बहुत जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं और पानी या पसीने के संपर्क में आते ही खराब हो जाते हैं।

इस वजह से केंद्रीय बैंक को हर साल पुराने नोटों को बदलने और नए नोटों की छपाई पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने पड़ते हैं। प्लास्टिक नोट आने से इस बार-बार होने वाले खर्च में बहुत बड़ी बचत होगी।

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प्लास्टिक करेंसी के मुख्य लाभ
इन नोटों का सबसे बड़ा गुण इनका टिकाऊपन है। पॉलीमर से बने ये नोट सामान्य कागजी नोटों के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये पूरी तरह से वॉटरप्रूफ होते हैं, जिसके कारण ये पानी, गंदगी या पसीने से सुरक्षित रहते हैं और मुड़ने या फटने से बचे रहते हैं।

इसके अलावा, इनकी सतह गैर-छिद्रपूर्ण होती है, जिसके कारण इन पर धूल, मिट्टी या बैक्टीरिया आसानी से नहीं चिपकते। इस वजह से ये नोट इस्तेमाल करने में कहीं अधिक स्वच्छ और हाइजीनिक रहते हैं।

जाली नोटों के धंधे पर लगेगी लगाम
प्लास्टिक नोटों को बाजार में उतारने का एक बड़ा फायदा नकली मुद्रा पर रोक लगाना भी है। इन नोटों में सुरक्षा के ऐसे आधुनिक उपाय शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना जालसाजों के लिए लगभग असंभव होगा।

इनमें ट्रांसपेरेंट विंडो, विशेष होलोग्राम और कई अन्य एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स शामिल होते हैं, जिससे जाली नोटों के कारोबार को पूरी तरह ठप किया जा सकता है।

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नई तकनीक के रास्ते में मौजूद चुनौतियां
फायदों के बावजूद इस नई व्यवस्था को लागू करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। शुरुआत में प्लास्टिक नोटों को छापने का खर्च सामान्य कागजी नोटों की तुलना में काफी ज्यादा होता है। इसके अतिरिक्त, ये नोट थोड़े चिकने होते हैं, जिससे हाथ से गिनते समय इनके फिसलने की समस्या हो सकती है।

अत्यधिक तापमान या तेज गर्मी में इनके सिकुड़ने की आशंका भी बनी रहती है। सबसे बड़ी चुनौती देश भर के एटीएम नेटवर्क को लेकर है, क्योंकि इन नोटों के हिसाब से सभी मशीनों को अपग्रेड करना पड़ेगा।

दुनिया भर में प्लास्टिक नोटों का चलन
वैश्विक स्तर पर देखें तो प्लास्टिक करेंसी का प्रयोग कोई नया प्रयोग नहीं है। वर्तमान में दुनिया के 60 से भी अधिक देशों में आंशिक या पूर्ण रूप से प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक को सबसे पहले साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने अपनाया था।

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इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और रोमानिया जैसे कई बड़े देशों ने भी अपनी अर्थव्यवस्था में इसे शामिल किया है।