जयपुर
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, राजस्थान ने वरिष्ठ अध्यापकों एवं बेसिक कंप्यूटर अनुदेशकों के हाल ही में जारी स्थानांतरण आदेशों में मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) पर कार्यरत महिला कार्मिकों को बड़ी राहत दी है। निदेशालय ने इस संबंध में नया आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश पर चल रही शिक्षिकाओं को तत्काल कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। आदेश के अनुसार 8 जुलाई एवं 10 जुलाई 2026 को जारी स्थानांतरण आदेशों में संबंधित कार्मिकों को आदेश जारी होने की तिथि से 10 दिन के भीतर कार्यमुक्त करने की शर्त रखी गई थी। अब निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि जो महिला कार्मिक वर्तमान में मातृत्व अवकाश पर हैं, उन्हें अवकाश समाप्त होने के बाद कार्यग्रहण करने पर 5 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से कार्यमुक्त किया जाएगा।
निदेशक माध्यमिक शिक्षा की ओर से जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि मातृत्व अवकाश से संबंधित इस संशोधन के अलावा स्थानांतरण आदेशों की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी। इस आदेश से मातृत्व अवकाश पर कार्यरत शिक्षिकाओं को तत्काल स्थानांतरण प्रक्रिया से राहत मिलेगी और वे अवकाश पूर्ण होने के बाद नियमानुसार नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कर सकेंगी।
तबादलों पर रोष, उग्र आंदोलन की चेतावनी
शिक्षकों के डूंगरपुर जिले से बाहर दूरस्थ स्थानों पर किए तबादलों पर राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के पदाधिकारियों ने रोष जताया। विधायक शंकरलाल डेचा से मुलाकात कर प्रतिशोधात्मक स्थानांतरणों को शीघ्र निरस्त नहींं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन सदैव शिक्षा, शिक्षक एवं शिक्षार्थियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहा है, चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार रही हो। हाल ही में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा ग्रीष्मावकाश एवं अन्य अवकाशों में कटौती संबंधी आदेश जारी किया गया था, जिसका संगठन ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया। सरकार द्वारा मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेने के कारण संगठन ने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शिक्षा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में रैली एवं प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया।
संगठन का आरोप है कि उक्त विरोध प्रदर्शन से नाराज होकर शिक्षा मंत्री के स्तर पर संगठन से जुड़े अधिकांश शिक्षकों एवं पदाधिकारियों का जिले से बाहर दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरण कर दिया गया जो गलत है। संगठन ने चेतावनी दी की जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में चरणबद्ध एवं व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग की होगी।