CJP प्रदर्शन के बीच मोहन भागवत का बड़ा संदेश, बोले- नई पीढ़ी सवाल पूछती है, संवाद जरूरी

नई दिल्ली

दिल्‍ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुआई में विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. NEET पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफे की मांग तेज हो गई है. CJP के प्रतिनिधियों की शुक्रवार को सरकार के दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत हुई थी. इस वार्ता में CJP की तरफ से सरकार के प्रतिनिधियों के समक्ष कुछ मांगें रखी गईं. बाद में मीडिया से बात करते हुए CJP के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान जब तक इस्‍तीफा नहीं देंगे, CJP का प्रदर्शन यूं ही चलता रहेगा. युवाओं और छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन के बीच अब राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्‍होंने कहा कि नई पीढ़ी हर बात पर सवाल पूछती है और उन्‍हें तर्क से समझाना पड़ता है. मोहन भागवत ने कहा कि बच्चों और युवाओं को अधिक अपनापन, समय और संवाद की जरूरत है। 

आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि आज के समय में परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने की है. उन्होंने माता-पिता से आह्वान किया कि वे बच्चों को पर्याप्त समय दें, उनकी जिज्ञासाओं का धैर्यपूर्वक समाधान करें और अपने व्यवहार से उन्हें संस्कार दें, क्योंकि बच्चे केवल उपदेश से नहीं बल्कि माता-पिता के आचरण से अधिक सीखते हैं. मोहन भागवत शुक्रवार को अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में विश्वमांगल्य सभा की ओर से आयोजित ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर जागरूकता सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मां ही मनुष्य के जीवन की पहली गुरु होती है और वही जीवनभर भावनात्मक संबल प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है. सृष्टि का निर्माण, पालन-पोषण और उसके निरंतर विकास में मातृत्व की केंद्रीय भूमिका है। 

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बच्चों के प्रश्नों का जवाब और मार्गदर्शन जरूरी
मोहन भागवत ने कहा कि समय और परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन मातृत्व के मूल मूल्य कभी नहीं बदलते. मातृत्व का आधार प्रेम, त्याग, करुणा और संस्कार है, जो हर युग में समान रूप से प्रासंगिक रहते हैं. उन्होंने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक विकास की भी है. इसके लिए माता-पिता को स्वयं भी निरंतर सीखते रहना चाहिए ताकि वे बच्चों के प्रश्नों और बदलते समय की चुनौतियों का सही मार्गदर्शन कर सकें. आरएसएस के सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार व्यवस्था और मातृत्व को हमेशा विशेष महत्व दिया गया है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महान विचारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी ने मातृत्व और भारतीय जीवन मूल्यों की महत्ता को अपने विचारों में प्रमुख स्थान दिया है। 

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‘भारतीय संस्‍कृति के बारे में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है’
मोहन भागवत ने कहा कि समाज में कई बार भारतीय संस्कृति और परंपराओं को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है, जबकि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और सशक्त है. उन्होंने लोगों से अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास बनाए रखने का आग्रह किया. साथ ही कहा कि भारत की सबसे बड़ी पहचान विविधता में एकता है और देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय संस्कृति तथा जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने विदेशी जीवनशैली की अंधी नकल से बचने और भारतीय परिवार व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया. विश्वमांगल्य सभा ने 23 और 24 जुलाई को विश्व युवक केंद्र में उत्तर भारत का राष्ट्रीय जागरूकता सम्मेलन आयोजित किया था. सम्मेलन में लगभग 280 महिलाओं ने भाग लिया, जबकि समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की 900 से अधिक प्रमुख महिलाएं उपस्थित रहीं. ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषय पर आयोजित इस संवाद के लिए करीब 2,000 से 2,500 महिलाओं ने रजिस्‍ट्रेशन कराया था। 

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23 प्रांत में अधिवेशन
संगठन के अनुसार, वर्ष 2026 में देश के 23 प्रांतों में आयोजित अधिवेशनों में लगभग 37 हजार महिलाओं ने भाग लिया. विश्वमांगल्य सभा वर्तमान में 33 प्रांतों में सक्रिय है और उसके साथ करीब छह लाख महिलाएं जुड़ी हैं. भारत के अलावा संगठन की गतिविधियां अमेरिका और नीदरलैंड सहित 14 देशों में संचालित हो रही हैं. संगठन का उद्देश्य महिलाओं में मातृत्व, संस्कार, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित कर परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को और सशक्त बनाना है।