ऑपरेशन मादुरो: ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरान के पास तैनात किया

न्यूयॉर्क

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत के बीच तनाव फिर चरम पर है. अमेरिका ने दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड को पारस की खाड़ी में भेजने का फैसला किया है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी चार अमेरिकी अधिकारियों ने दी है. इससे पहले खबरें थीं कि USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को भेजा जाएगा, लेकिन अब फोर्ड को चुना गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर बातचीत फेल हुई तो अमेरिका ईरान पर हमला करने को तैयार है.

क्या हुआ नया?

    USS गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती: यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसमें 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, हजारों सैनिक और एस्कॉर्ट जहाज होते हैं.

    पहले यह, यह कैरेबियन सागर में था. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जुड़े ऑपरेशन में शामिल था.

    अब इसे मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. अप्रैल अंत या मई तक यह घर (नॉरफोक, वर्जीनिया) नहीं लौटेगा – क्रू के लिए लंबी तैनाती और मेंटेनेंस में देरी होगी.

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    पहले की रिपोर्ट: वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा था कि USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (वर्जीनिया तट पर ट्रेनिंग कर रहा) को भेजा जा सकता है. लेकिन अब फोर्ड को चुना गया.

    पहले से मौजूद ताकत: USS अब्राहम लिंकन कैरियर और कई अन्य जहाज पहले से मिडिल ईस्ट में तैनात हैं.

गेराल्ड आर फोर्ड क्लास 

यह अमेरिकी जंगी जहाज है दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर है. अपने क्लास का पहला विमानवाहक पोत, जिसे मई 2017 में कमीशन किया गया. इसके चार और पोत तैयार हो रहे हैं. यह 337 मीटर लंबा है. इसकी बीम 748 मीटर की है. इसका फुल लोड डिस्प्लेसमेंट 1 लाख टन है. इसपर 78 मीटर चौड़ा फ्लाइट डेक है. इसपर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्चिंग सिस्टम लगा है. एडवांस्ड अरेस्टिंग गीयर की सुविधा है. इसपर एक बार में 75 एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं. इसके आलावा यह 4539 सैनिकों को अपने साथ ले जा सकता है. 

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ट्रंप का बयान: हमला करने को तैयार

ट्रंप ने इजरायली चैनल N12 को इंटरव्यू में कहा…

    या तो हम डील करेंगे, या बहुत सख्त कदम उठाएंगे – जैसे पिछली बार. 

    अगर ईरान के साथ बातचीत फेल हुई, तो सैन्य कार्रवाई होगी.

    ट्रंप मैक्सिमम प्रेशर नीति अपना रहे हैं – प्रतिबंध, सैन्य तैनाती और धमकी से ईरान को नया परमाणु समझौता करने पर मजबूर करना.

क्यों हो रहा है यह सब?

    ईरान का परमाणु कार्यक्रम: ईरान यूरेनियम को हथियार बनाने लायक स्तर तक समृद्ध कर रहा है. अमेरिका और इजरायल इसे बड़ा खतरा मानते हैं.
    ट्रंप का रुख: 2018 में ट्रंप ने पुराना समझौता (JCPOA) तोड़ा था. अब नई डील चाहते हैं – ईरान को पुरानी से बेहतर शर्तें माननी होंगी.

    रणनीतिक महत्व: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ताकत बढ़ाकर ट्रंप ईरान को दबाव में रखना चाहते हैं. कैरियर से F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर इस्तेमाल हो सकते हैं.

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    क्षेत्रीय तनाव: इजरायल-ईरान संघर्ष, हूती हमले और गाजा युद्ध के बीच अमेरिका अपने सहयोगियों (इजरायल, सऊदी) की रक्षा कर रहा है.

क्या होगा आगे?

फोर्ड की तैनाती से अमेरिका की हवाई ताकत दोगुनी हो जाएगी. अगर दूसरा कैरियर (बुश) भी आया, तो क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी और मजबूत होगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह 'सिग्नलिंग' है – अमेरिका दिखा रहा है कि वह गंभीर है. दुनिया शांति की अपील कर रही है, ताकि बातचीत से हल निकले.

अमेरिका ईरान को परमाणु डील के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. दुनिया के सबसे बड़े कैरियर की तैनाती तनाव को और बढ़ा रही है. फिलहाल बातचीत का मौका है, लेकिन फेल होने पर मिडिल ईस्ट में बड़ा संघर्ष हो सकता है.