प्रदेश में बैंकों की 6500 से ज्यादा शिकायतें, उपभोक्ताओं का गुस्सा सबसे ज्यादा इस बैंक पर

भोपाल 

मध्यप्रदेश में बैंकिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं के बीच तालमेल बिगड़ता नजर आ रहा है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की ताजा रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 10 मार्च 2026 तक सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर बैंकों के खिलाफ कुल 6544 शिकायतें लंबित हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) से लोग सबसे ज्यादा खफा हैं जोकि शिकायतों के मामले में पहले स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि आम जनता की शिकायतों को निपटाने में प्रदेश की राजधानी भोपाल ही सबसे फिसड्डी साबित हो रही है। यह आंकड़े बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब डिजिटल इंडिया के दौर में बैंकिंग सेवाओं के सरल होने का दावा किया जा रहा है, तब हजारों लोगों का अपनी छोटी- छोटी समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचना प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय है।

भोपाल के लोग सबसे ज्यादा परेशान, रीवा और ग्वालियर भी पीछे नहीं
जिलों की बात करें तो भोपाल 434 लंबित शिकायतों के साथ सूची में टॉप पर है। इसके बाद रीवा (287), ग्वालियर (279) और इंदौर (241) का नंबर आता है। छोटे जिलों में अलीराजपुर सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां मात्र 10 शिकायतें लंबित हैं।

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आम आदमी की सबसे बड़ी मुसीबत- खाता संचालन और सरकारी योजनाएं
रिपोर्ट के मुताबिक, जनता सबसे ज्यादा परेशान अपने बैंक खाते के संचालन को लेकर है। कुल 6544 शिकायतों में से लगभग 49 फीसदी मामले (3191) केवल खाता खोलने, बंद करने या खातों को बिना सूचना होल्ड करने से संबंधित हैं। इसके साथ ही एटीएम कार्ड जारी करने, एटीएम कार्ड से राशि कटने (230 शिकायतें), आधार कार्ड लिंक/खाते में केवायसी/इ-केवायसी (337 शिकायतें), पासबुक जारी करना/पासबुक ​प्रिंटिंग एवं चेक बुक से संबंधित (113 शिकायतें), शासकीय ऋण एवं अनुदान/ब्याज अनुदान से संबंधित (1454 शिकायतें) शामिल हैं।

लोकपाल में कर सकते शिकायत…
आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को ग्राहक शिकायतों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा में करना अनिवार्य है। लेकिन सीएम हेल्पलाइन का यह डेटा बताता है कि धरातल पर बैंक अधिकारियों और जनता के बीच क्युनिकेशन गैप गहराता जा रहा है। यदि आपका बैंक आपकी सुनवाई नहीं कर रहा है, तो आप सीएम हेल्पलाइन (181) के अलावा आरबीआई के लोकपाल से भी संपर्क कर सकते हैं।

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बैंकों में स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण
सेवानिवृत्त एसबीआइ अधिकारी हेमंत गोस्वामी बताते हैं कि काम के बोझ के कारण कई बार सेवाओं में कमी आती है। इसका एक बड़ा कारण बैंकों में स्टाफ की कमी का होना भी है। फिर भी समय-समय पर बैंककर्मी ग्राहकों का समस्या का समाधान करते रहते हैं। ग्राहकों की अपेक्षाएं और त्वरित सेवा की आशा अधिक रहती है। एमपी में बैंकिंग सेक्टर में अधिक कार्य क्षेत्र स्टेट बैंककर्मियों पर होने के कारण उनकी शिकायतेें भी अधिक हैं।

किस बैंक से जनता को कितनी शिकायत?
सरकारी बैंकों में शिकायतों का ग्राफ काफी ऊंचा है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) 1418 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (817) और बैंक ऑफ इंडिया (746) का नंबर आता है। निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक (346) के खिलाफ सबसे अधिक मामले दर्ज हैं।

अधिकारियों के स्तर पर अटकी फाइलें
शिकायतों के निराकरण की सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश शिकायतें एल1 (रीजनल मैनेजर) और एल3 (अग्रणी जिला प्रबंधक) के स्तर पर अटकी हुई हैं।
■ एल1 स्तर पर : 2,941 मामले
■ एल2 स्तर पर : 2,446 मामले

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कुल लंबित शिकायतें : 6544
सबसे ज्यादा शिकायतों वाला शहर : भोपाल (434 मामले) सबसे बड़ी समस्या : बैंक खाता खोलने, बंद करने या होल्ड होने से जुड़ी (3191 मामले)