रनिंग करते समय लोग कर रहे ये बड़ी गलती, डॉक्टर ने दी सलाह

रनिग ऐसी कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज है जिससे हार्ट के साथ-साथ शरीर के कई मसल्स ट्रेन होते हैं. आजकल काफी सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें जिम जाने का समय नहीं मिल पाता तो वे लोग जिम की जगह रनिंग को अपनी डेली एक्टिविटी में शामिल किए हुए हैं. वहीं आजकल फिटनेस का क्रेज भी हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है तो सुबह-सुबह पार्कों और सड़कों पर दौड़ते लोग आम बात हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह मेहनत आपको फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकती है? हैदराबाद के एक न्यूरोलॉजिस्ट ने X पर बताया है कि ज्यादातर रनर्स गलत तरीके से ट्रेनिंग कर रहे हैं जिसका नेगेटिव असर भी हो सकता है. तो आइए रनिंग के दौरान लोग कौन सी गलती कर रहे हैं और सही तरीका क्या है, इस बारे में जान लेते हैं.

क्या गलती कर रहे हैं लोग?
हैदराबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने बताया, हम अक्सर रनिंग के दौरान अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं लेकिन असली फिटनेस तेज दौड़ने में नहीं, बल्कि धीमे दौड़ने में छिपी है. यदि आपकी हर दौड़ आपको थकाकर चूर कर रही है तो आप ट्रेनिंग नहीं बल्कि खुद को थका रहे हैं.'

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'फिटनेस की दुनिया में बोला जाता है कि तेज रनिंग करना चाहिए लेकिन फिजियोलॉजिकल यानी फिजिकल साइंस के लिहाज से तेज रनिंग करना सही नहीं है. हाई हार्ट रेट और हर बार रिकॉर्ड तोड़ने की होड़ शरीर पर एक्स्ट्रा दबाव डालती है. असल में परफॉर्मेंस में सुधार तब आता है जब आप अपने शरीर को समझने लगते हैं, न कि उसे हर वक्त लिमिट से पुश करने की कोशिश करते हैं.

क्या है 'जोन 2-3' रनिंग का फंडा?
डॉ. सुधीर ने समझाया, 'धीमी गति से रनिंग या जो 2-3 रनिंग हमारे माइटोकॉन्ड्रियल एफिशिएंसी को बढ़ाती है. यह हमारे शरीर का असली एंड्योरेंस इंजन है. दरअसल, जब आप धीमी गति से दौड़ते हैं तो आपकी रेस्टिंग हार्ट रेट कम होती है और एरोबिक बेस मजबूत होता है. इससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है और आप ज्यादा लंबे समय तक कंसिस्टेंसी के साथ दौड़ पाते हैं. इसके विपरीत लगातार तेज दौड़ने से थकान बढ़ती है और एक समय के बाद प्रोग्रेस रुक जाती है.'

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एथलीट्स का सीक्रेट फॉर्मूला
यह सिर्फ एक थ्योरी नहीं है, बल्कि दुनिया के टॉप एथलीट्स इसी तरीके से ट्रेनिंग करते हैं. वे अपनी कुल ट्रेनिंग का 70 से 80 फीसदी हिस्सा आसान दौड़ को देते हैं. वे अपनी पूरी ताकत सिर्फ खास मौकों या रेस के लिए बचाकर रखते हैं.

डॉ. सुधीर का कहना है कि अगर आप दौड़ते समय आसानी से बातचीत नहीं कर पा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपकी स्पीड जरूरत से अधिक है.

हार्ट ट्रेन करें, ईगो को नहीं
सोशल मीडिया पर अपनी स्पीड की फोटो-वीडियो दिखाने की होड़ अक्सर लोगों को चोटिल कर देती है. तेज दौड़ना सुनने में अच्छा लगता है लेकिन धीमी दौड़ आपको वास्तव में बेहतर बनाती है.

डॉक्टर की सलाह साफ है कि अपने हार्ट को ट्रेन करें, अपने ईगो को नहीं. दौड़ना एक लंबी प्रोसेस है, इसे शॉर्टकट या दिखावे के चक्कर में खराब न करें. सही पेस वही है जिसमें आपका शरीर थके नहीं, बल्कि रिचार्ज महसूस करे.

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