सिलेंडर के पीछे पॉलिथीन रखना बन सकता है आर्थिक और मानसिक संकट का कारण

अक्सर हम अपनी रसोई किचन को बाहर से तो चकाचक रखते हैं, लेकिन सिलेंडर के पीछे की  छोटी सी जगह को स्टोर रूम समझ लेते हैं. हम अक्सर सिलेंडर के पीछे कई चीजें ठूंस देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत घर की सुख-शांति को भंग कर सकती है, यहां तक की आपका बैंक बैलेंस जीरो हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह लापरवाही न केवल धन की हानि कराती है, बल्कि बड़े संकट को भी न्योता देती है.

सिलेंडर के पीछे पॉलिथीन रखना क्यों है भारी भूल?
1. राहु और मंगल का खतरनाक मेल
वास्तु में गैस चूल्हा और सिलेंडर अग्नि (मंगल) के प्रतीक हैं.  वहीं, प्लास्टिक और कचरा राहु का प्रतीक माना जाता है. जब आप सिलेंडर के पास या उसके पीछे पॉलिथीन और कबाड़ रखते हैं, तो मंगल और राहु का मेल होता है. इससे घर में अचानक गुस्सा, लड़ाई-झगड़े और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है.

2. लक्ष्मी के आने का रास्ता रुक जाता है
रसोई को मां अन्नपूर्णा का वास माना जाता है. अग्नि देव के स्थान के आसपास गंदगी या रद्दी जमा होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है. बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि जिस रसोई में सिलेंडर के पास कचरा होता है, वहां पैसा पानी की तरह बहने लगता है.

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3. सेहत पर पड़ता है बुरा असर
रसोई में अग्नि का स्थान जितना साफ रहेगा, घर के सदस्यों की सेहत उतनी ही अच्छी रहेगी.  सिलेंडर के पीछे की गंदगी से घर में नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर घर की महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है.

ये चीजें लाती है मुसीबत
झाड़ू: वास्तु शास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, लेकिन इसे रखने के खास नियम हैं.  झाड़ू का काम गंदगी साफ करना है और सिलेंडर (अग्नि) का काम पोषण देना है. जब आप झाड़ू को अग्नि के स्थान पर रखते हैं, तो घर की बरकत भी जलने लगती है.  माना जाता है कि चूल्हे या सिलेंडर के पास झाड़ू रखने से घर के मुखिया पर कर्ज बढ़ता है. यह स्थिति घर में पैसा टिकने नहीं देती.  झाड़ू पैरों में आने वाली चीज है, जबकि रसोई पूजनीय है. इन दोनों को एक साथ रखना मां अन्नपूर्णा का अनादर माना जाता है.

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पुराने कपड़े या रद्दी: सिलेंडर के पीछे अक्सर हम बेकार पड़े बोरे, पुराने पोंछे या अखबार , पॉलिथीन की रद्दी ठूंस देते हैं. वास्तु में फटे-पुराने कपड़े और रद्दी राहु और शनि की नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं.  अग्नि के पास इनका होना घर में कलह (झगड़े) पैदा करता है. बिना वजह परिवार के सदस्यों में चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है.

जूते-चप्पल: कई बार हम स्टोर रूम या सिलेंडर वाली जगह को इग्नोर करते हैं और वहां पुराने जूते-चप्पल उतार देते हैं.  जूते-चप्पल बाहर की नकारात्मक ऊर्जा और धूल-मिट्टी लेकर आते हैं. रसोई जैसे पवित्र स्थान पर, जहाँ हमारा भोजन बनता है, वहां इन्हें रखना बीमारियों को न्योता देना है.  वास्तु के अनुसार, रसोई में जूते-चप्पल होने से घर का भाग्य कमजोर होता है. यह घर के सदस्यों के सम्मान और सफलता में कमी लाता है.  पैर और जूते शनि से जुड़े हैं. इन्हें मंगल (अग्नि) के स्थान पर रखना आपके बनते हुए कामों को बिगाड़ सकता है.

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सुरक्षा का भी है बड़ा खतरा
वास्तु को एक पल के लिए किनारे भी रख दें, तो सुरक्षा के लिहाज से यह जानलेवा हो सकता है. गैस सिलेंडर से हल्की सी भी लीकेज होने पर ये पॉलिथीन और कागज आग को तेजी से पकड़ सकते हैं. हवा के आने-जाने का रास्ता रुकने से सिलेंडर के आसपास गर्मी बढ़ सकती है, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

क्या करें?
रसोई घर में गैस चूल्हा (अग्नि तत्व) दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) में रखा जाना सबसे शुभ और उत्तम माना जाता है. आज ही सिलेंडर के पीछे और आसपास की जगह को खाली करें.वहां जमी धूल-मिट्टी को साफ करें.कोशिश करें कि सिलेंडर वाली जगह हवादार हो.