बुलडोजर एक्शन पर सियासी घमासान: डिप्टी CM बोले—चुनी हुई सरकार ने नहीं दिया था आदेश

जम्मू और कश्मीर
जम्मू और कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने शनिवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा पत्रकार अरफज डैंग के पिता का घर गिराए जाने की घटना की जांच का आदेश देने का आग्रह किया। चौधरी ने इस कार्रवाई को चुनिंदा और प्रतिशोधी बताते हुए इसमें शामिल अधिकारियों को निलंबित करने की भी मांग की। पत्रकार के परिवार से मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए चौधरी ने सवाल उठाया कि इस विध्वंस के लिए कौन जिम्मेदार है, जबकि निर्वाचित सरकार ने इसका आदेश नहीं दिया था।
 
चौधरी ने एलजी को संबोधित करते हुए कहा, "पुलिस, जिसने विध्वंस के लिए समर्थन दिया, वह आपकी थी। जेडीए के उपाध्यक्ष आपके द्वारा नियुक्त किए गए हैं। अगर आप कहते हैं कि यह विध्वंस आपके आदेश पर नहीं किया गया, तो इन अधिकारियों ने एलजी या मुख्यमंत्री से पूछे बिना इसे करने की हिम्मत कैसे की?" उन्होंने कहा, "हम निर्वाचित सरकार, खुले तौर पर कह रहे हैं कि हमने इसका आदेश नहीं दिया। उमर अब्दुल्ला सरकार के उपमुख्यमंत्री कह रहे हैं कि यह जम्मू-कश्मीर सरकार की मंजूरी से नहीं किया गया है।" उपमुख्यमंत्री ने मांग की कि एलजी विध्वंस की जांच का आदेश दें और पता लगाएं कि यह किसके आदेश पर किया गया था।

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उन्होंने जेडीए उपाध्यक्ष से जवाब मांगा कि विध्वंस का आदेश किसने दिया और कहा कि मुख्यमंत्री की सहमति के बिना यह कार्रवाई करने वाले अधिकारियों पर जवाबदेही सख्ती से तय की जाएगी। चौधरी ने वरिष्ठ भाजपा नेता रविंदर रैना के उस कथित दावे का जिक्र किया जिसमें उन्होंने एलजी से बात करने के बाद विध्वंस आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। चौधरी ने सच्चाई जानने के लिए भाजपा नेता के मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड को र्प्राप्त करने की मांग की।

JDA ने गुरुवार को ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में एक अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान 72 वर्षीय गुलाम कादिर डैंग के एक मंजिला घर को ध्वस्त कर दिया था। निवासियों ने दावा किया कि वे पिछले चार दशकों से वहां रह रहे थे और उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

चौधरी ने कहा कि निर्वाचित सरकार न तो कमजोर है और न ही असहाय और वह पत्रकारों या गरीबों को निशाना बनाने वाले चुनिंदा या प्रतिशोधी उपायों की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री के निर्देश पर आए थे ताकि लोगों को यह बता सकें कि हमारी सरकार कभी भी सस्ते या बदले की रणनीति नहीं अपनाएगी।

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उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) को दबाने की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, "अगर कोई सोचता है कि वे जम्मू-कश्मीर को उत्पीड़न और दमन से चला सकते हैं, तो यह लंबे समय तक नहीं चलेगा।"