रेलवे का 40 साल पुराना रिजर्वेशन सिस्टम बदलेगा, अगस्त से यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएं

नई दिल्ली

भारतीय रेलवे अगस्त महीने से अपने करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है. 1986 से इस्तेमाल हो रहे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) की जगह अब नया और आधुनिक सिस्टम लाया जाएगा. रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद हो जाएगी. साथ ही यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी। 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो. रेलवे अगस्त से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों को नए रिजर्वेशन सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू करेगा। 

1986 में शुरू हुआ था मौजूदा सिस्टम
भारतीय रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था. पिछले चार दशकों में इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वैसी ही बनी रही. इस दौरान यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में रेलवे को एक ज्यादा सक्षम और आधुनिक सिस्टम की जरूरत महसूस हो रही थी। 

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रेलवे ने साल 2002 में इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी. आज हालात यह हैं कि लगभग 88 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं. ऐसे में नए सिस्टम को इसी बढ़ती डिजिटल मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 

ज्यादा क्षमता वाला होगा नया सिस्टम
रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता के साथ काम करेगा. इससे टिकट बुकिंग के दौरान सर्वर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रियों को वेबसाइट या ऐप पर बेहतर अनुभव मिलेगा। 

त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय अक्सर वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें आती हैं. रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा। 

RailOne ऐप की लोकप्रियता बढ़ी
रेलवे का यह बदलाव उसकी डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। 

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इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुक और कैंसिल कर सकते हैं, ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कई दूसरी रेलवे सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस ऐप के जरिए हर दिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं. इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं। 

AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना
नए सिस्टम की सबसे खास सुविधाओं में से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेटिंग टिकट प्रेडिक्शन फीचर है. यह सुविधा यात्रियों को बताती है कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। 

रेलवे के अनुसार, इस फीचर की सटीकता पहले करीब 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी। 

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करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगस्त से शुरू होने वाला यह बदलाव रेलवे के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। 

करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलकर रेलवे अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग को ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगा, जिसका फायदा देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा।