4 लेन से 2 लेन में सिमटा रास्ता, डबल-डेकर फ्लाइओवर पर विवाद; MMRDA ने डिज़ाइन खामी से किया इनकार

मुंबई.

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा मीरा-भायंदर इलाके में में बनाए गए एक नए डबल-डेकर फ्लाइओवर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि यह फ्लाइओवर चार लेन से अचानक दो लेन में तब्दील होकर सिमट जा रहा है। अचानक चार लेन से दो लेन में सड़क की चौड़ाई कम करने से वहां दुर्घटनाओं को खुला न्योता दिया जा रहा है। इससे वहां यातायात की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, MMRDA ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह कोई डिजाइन की खामी नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित इंजीनियरिंग निर्णय है, जिसे भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘Gems of Mira Bhayander’ नामक अकाउंट ने एक वीडियो पोस्ट कर सवाल उठाया कि मेट्रो लाइन-9 परियोजना का हिस्सा यह फ्लाइओवर जाम कम करने के बजाय कहीं हालात और खराब तो नहीं करेगा? पोस्ट में कहा गया कि चार लेन वाला फ्लाइओवर अचानक दो लेन में तब्दील हो जाता है। इससे वहां ट्रैफिक कंजेशन हो सकता है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि MMRDA ने इस डिजायन को आखिर कैसे पास कर दिया?
MMRDA का पक्ष

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MMRDA अधिकारियों के अनुसार, फ्लाइओवर को भायंदर (पूर्व) की ओर फिलहाल दो लेन के लिए ही डिजाइन किया गया है, जबकि भायंदर (पश्चिम) की ओर भविष्य में दो अतिरिक्त लेन जोड़ने का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह डिजाइन राइट ऑफ वे की सीमाओं और वेस्टर्न रेलवे लाइन के ऊपर भविष्य में विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसमें कोई खामी नहीं है।
लोगों और विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने MMRDA के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा, “यह पुल दुर्घटनाओं को न्योता है। 2022 में सायरस मिस्त्री की मौत भी एक खराब पुल डिजाइन के कारण हुई थी। MMRDA वही गलती दोहरा रहा है और इसे मानने को तैयार नहीं है। आखिर कितनी जानें जोखिम में डालेंगे?” वहीं, अधिवक्ता कृष्णा गुप्ता ने निर्माण गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि “MMRDA आम लोगों की जान से खेल रहा है। जिस ठेकेदार जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स को पहले BMC ने ब्लैकलिस्ट किया था, उसे फिर भी बड़े प्रोजेक्ट मिल रहे हैं। इससे पहले बनाए गए दो डबल-डेकर पुल एक साल के भीतर ही गड्ढों से भर गए थे।”
कौन-से हिस्से पर विवाद?

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विवाद मुख्य रूप से 1.5 किमी लंबे दीपक हॉस्पिटल–फाटक रोड सेक्शन (भायंदर पूर्व) को लेकर है। वहीं, SK स्टोन सर्कल–शिवार गार्डन (1.1 किमी) काशीगांव मेट्रो स्टेशन–साईं बाबा हॉस्पिटल (754 मीटर) जैसे अन्य हिस्से पहले ही यातायात के लिए खोल दिए गए हैं। MMRDA का कहना है कि फ्लाइओवर में स्पष्ट साइनबोर्ड, रंबल स्ट्रिप्स, क्रैश बैरियर जैसे सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और यातायात पुलिस की सलाह को भी अंतिम चरण में शामिल किया जा रहा है। भविष्य में चौड़ीकरण के लिए नगर निगम से समन्वय की बात भी कही गई है।
आदित्य ठाकरे का तंज

इस पूरे मामले पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए एक्स पर लिखा, “MMRDA और इस ‘मास्टरपीस’ डिजाइन का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। अगले साल इसे दूसरे देशों को सिखाने के लिए MoU होगा। पुल वही पूरा होगा—2047 में!”उन्होंने आगे कहा कि चार लेन से दो लेन में अचानक कटौती “बेहद मूर्खतापूर्ण और अव्यवस्थित डिजाइन” है, जो यातायात में अराजकता ही फैलाएगी। फिलहाल, यह फ्लाइओवर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और जन-सुरक्षा के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है। जहां MMRDA इसे भविष्य-उन्मुख योजना बता रहा है, वहीं नागरिक और विशेषज्ञ इसे खतरनाक प्रयोग करार दे रहे हैं।

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