परिवार के भरण-पोषण के लिए नंगे पांव साड़ी में दौड़ी 1600 मीटर, पत्नी की मौत के बाद कविता की संघर्ष की कहानी

शरम भी लग रहा था, सब लोग देख रहे थे। मेरी चप्पल भी टूटी हुई थी। कोई देखेगा को का बोलेगा। शरम लग रही थी। कोई व्यवस्था नहीं थी, इसलिए साड़ी में ही नंगे पैर दौड़े… रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की 28 वर्षीया कविता देवी होमगार्ड बनना चाहती है, ताकि परिवार का भरण-पोषण कर सके और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सके।

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रामगढ़ में 4 अक्तूबर को सिदो-कान्हू मैदान में ‘अंकित रनर एकेडमी’ की ओर से ओपन टू ऑल होमगार्ड भर्ती प्री-ट्रायल का आयोजन किया गया था। इसमें कविता ने साड़ी पहन कर 1600 मीटर की दौड़ करीब 6:45 मिनट में पूरी की थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर छा जाने के बाद कविता देवी के संघर्ष की कहानी सामने आई।

 

बिना ब्रश किए, बिना खाए ही मैदान में पहुंच गए थे: कविता

कविता देवी ने बताया, ‘वहां सबके साथ कोई न कोई आया था। किसी का हसबैंड साथ में है, किसी का देवर, किसी का मम्मी-पापा। हम तो बिना ब्रश किए, बिना खाए ही मैदान में पहुंच गए थे क्योंकि जल्दी जाना था। वहां देखा कोई लड़की केला खा रही है, कोई सेब खा रही है, किसी के लिए बोतल में पानी आ रहा है, ये देखकर मुझे अंदर से अजीब फीलिंग आ रही थी। लग रहा था कि हम दौड़ भी पाएंगे या नहीं, कहीं चक्कर खाकर न गिर पड़ें।’

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कविता के पति का तीन साल पहले हो गया निधन

 

के पति का तीन साल पहले निधन हो गया। पति का इलाज में काफी खर्चा हुआ। इससे कर्जा भी हो गया। पति की मौत के बाद कविता पर घर की जिम्मेदारी आ गई। अब कविता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रही है। परिवार में उसके ससुर के अलावा कोई अन्य पुरुष सदस्य नहीं है। वह दो गोतनी में बड़ी है। कविता के एक बेटा और एक बेटी है।

 

कविता ने बताया कि घर का हालत ठीक नहीं है। ससुर हैं वो बुजुर्ग हैं। वो थोड़ा बहुत खेती का काम कर लेते हैं, लेकिन हल नहीं जोत सकते हैं। खेती करवाते हैं तो ट्रैक्टर से मजदूरी देनी पड़ती है। इसलिए खेती भी ज्यादा नहीं कर पाते हैं। इसलिए खेती खाने पीने के लिए ही करते हैं।

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ईंट-भट्टा और खेतों में काम करती हैं कविता

कविता ने बताया कि वो परिवार के भरण पोषण के लिए खेतों में, ईंट भट्टे पर काम करती हैं। उन्होंने बताया कि जब धान रोपनी का सीजन आया तो खेतों में धान रोपनी की। फिर कटाई होगी तो कटाई करेंगे। ईंट-भट्टा पर काम होता है तो वहां जाकर काम कर लेती हैं।

 

 

कविता देवी के डुमरी विधायक ने की मदद, दिलवाया ट्रैकसूट और जूते

डुमरी विधायक जयराम महतो ने कविता देवी से फोन पर बातचीत कर उसके संघर्ष की सराहना की। जयराम महतो ने कविता से कहा कि दीदी आपको देखकर मुझे आपमें अपनी मां दिखी। विधायक ने कविता की मदद कर उन्हें जूते और ट्रैक सूट दिलवाया है।