सत्ता सुख के लालच में दोनों अजीत जोगी का कर रहे अपमान, कांग्रेस में जाने की कोई इच्छा नही : रेणु जोगी

Johar36garh News|मरवाही उपचुनाव में जोगी कांग्रेस के बीजेपी को समर्थन देने के बाद कांग्रेस ने अपना आखरी कार्ड खोल दिया है|  इससे जोगी कांग्रेस से तीसरे कौन की अटकलने भी खत्म हो गई है | पहले से कांग्रेस में जाने की मंसा जाहिर कर चुके दोनों विधायकों ने पार्टी फैसले से हटकर कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही है|  जिसका जोगी कांग्रेस ने भी प्रेस कान्फ्रेंस के माध्यम से दोनों विधायकों पर सत्ता सुख के लालच में आकर लिया हुआ निर्णय बताया है| प्रेस कान्फ्रेंस में रेणु जोगी ने साफ कर दिया की उनकी कांग्रेस में जाने की कोई इच्छा नही है|

दरअसल छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे) के दो विधायक देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा द्वारा राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के साथ प्रेस कान्फ्रेंस कर कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही थी| करीब 30 मिनट की प्रेस कांफ्रेंस में देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वो कांग्रेस के साथ हैं और कांग्रेस की विचारधार के साथ ही आगे चलना चाहते हैं। देवव्रत सिंह ने कहा कि रेणु जोगी चाहती है कि कांग्रेस में वो शामिल हो जाये, चुनाव के वक्त भी कांग्रेस के ही टिकट पर लड़ना चाहती थी, जिसके लिए उन्होंने आखिरी वक्त तक इंतजार किया। वो हमेशा से कांग्रेस के विचारधारा के साथ खड़ी रही है। उन्होंने ने आगे कहा की अजीत जोगी जब कोमा में थे, तो उस दौरान भी ये कोशिश हुई थी कि कांग्रेस में शामिल हो जाये, क्योंकि वो चाहते थे कि कांग्रेस में वो शामिल हो जायेें, लेकिन तकनीकी वजहों से ऐसा संभव नहीं हो पाया। देवव्रत सिंह ने कहा कि जनवरी में अजीत जोगी के निर्देश पर ही उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की थी।

यहां पर यह भी बताना लाजमी होगा की अजीत जोगी के जीते जी मरवाही विधानसभा पर उनके और उनके परिवार की दावेदारी पर कोई आंच नहीं आई थी| इसी विधानसभा से स्वयं अजीत जोगी कई बार विधायक रहे और उनके बेटे अमित जोगी भी यहां से विधायक रह चुके हैं | अजीत जोगी के जाने बाद यह स्थिति निर्मित हुई है |

रविवार की शाम पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी, विधायक रेणु जोगी और धरमजीत सिंह ने प्रेस कान्फ्रेंस किया, जिसमें अमित जोगी ने कहा कि देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा मेरे भाई हैं। मैं उनका दिल से सम्मान करता हूँ। मेरे पिता ने भी उनको अपना बेटा माना। मुझे पूरा विश्वास है जब वे मेरे पिता जी स्वर्गीय अजीत जोगी का उनके मरणोपरांत अपमान करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम का भाषण सुने होते, तो कदापि उनको अपमानित करने वालों और उनके परिवार को ख़त्म करने की साज़िश करने वालों का साथ देने गौरेला नहीं आते बल्कि उनके सम्मान की रक्षा करने में मेरी माँ और मेरा साथ देते।

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जब मुख्यमंत्री मेरे पिता को नक़ली, निकम्मा, ग़द्दार और पाखंडी कह रहे थे,तब उन्होंने प्रेस वार्ता क्यों नहीं की? जब उन्होंने मेरा और मेरे दूध पीते बेटे की माँ का नामांकन रद्द किया,तब उन्होंने प्रेस वार्ता क्यों नहीं की? अगर वास्तव में वे उनका सम्मान करते तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देशन पर पहले वो मेरे पिता जी की समाधि में जाकर अपनी फ़ोटो नहीं खिंचवाते और उसके ठीक बाद उनको मरणोंपरांत अपमानित करने वालों के समर्थन में प्रेस वार्ता नहीं करते।अपने इस आचरण से उन्होंने मेरे स्वर्गीय पिता की आत्मा को दुःख पहुँचाया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने जीते जी किस प्रकार मेरे स्वर्गीय पिता को प्रताड़ित किया, उनको अंतागढ़ और झीरम और न जाने कितने और मामलों में झूठा फँसाने का लगातार षड्यंत्र रचते रहे, मेरे पिता का छत्तीसगढ़ के लिए क्या सपने थे- इन सब बातों के बारे में विस्तार से मेरे पिता ने खुद अपनी आत्मकथा में लिखा है। मैं उसे पढ़ने की सलाह दोनों को दूँगा।

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वहीं कोटा विधायक और अमित जोगी की मां डॉ रेणु जोगी ने दोनों विधायकों के बयान पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि वे कदापि कांग्रेस में जाने की इच्छा नही रखती। उन्होंने कहा कि स्व अजीत जोगी के स्वर्गवास के बाद भी लगातार कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा अभद्र टिप्पणी कर उन्हें अपमानित किया जा रहा है इससे मैं व्यथित हूँ ।

जोगी जी ने आईएएस की नौकरी छोड़कर 32 साल तक पूरी निष्ठा से कांग्रेस की सेवा की है। लेकिन उनके नेताओं द्वारा लगातार जोगी जी और हमारे परिवार को अपमानित करने का कोई मौका नही छोड़ा जा रहा है। दोनों विधायकों के कांग्रेस को समर्थन देने की बात पर रेणु जोगी ने कहा कि सत्ता सुख पाने के लालच में अब वे जोगी जी का अपमान कर रहें हैं।

उधर देवव्रत और प्रमोद शर्मा के मरवाही उपचुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने की अपील किये जाने पर भड़के लोरमी विधायक धरमजीत सिंह ने उन्हें हिदायत देते हुए कहा नाखून काट कर शहीद होने का दिखावा न करें। उन्होंने कहा कि यदि वे कांग्रेस पार्टी में जाना चाहते हैं तो स्वतंत्र है और कभी भी विधायकी से इस्तीफा देकर वे जा सकते हैं ।

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धरमजीत सिंह ने कहा कि शायद अजीत जोगी को इन दोनों नेताओं की निष्ठा पर पहले ही शक रहा होगा इसलिए उन्हें कोर कमेटी में जगह नहीं दी गयी थी ।