JJohar36garh News|बीजापुर के तर्रेम में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में अपनी बटालियन को लीड करने के दौरान हुए शहीद सब इंस्पेक्टर दीपक भारद्वाज के अंतिम दर्शन में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा| बड़े नेता, अधिकारियों के साथ प्रदेशभर से पहुंचे लोग शहीद के अंतिम दर्शन को बेताब था| हर किसी की आँखें नम थी | चार पहिया और बाइक रैली की लम्बी काफिले के साथ जब शाम 5 बजे शहीद का शव उनके गृह ग्राम पिरहिद पहुंचा तो एक पल के लिए सभी की सांसे थम सी गई| गम गिहिन माहौल में कुछ पल के लिए शव को उनके निवास ले जाया गया, जहां आँसूभरे नयनों से परिवार के लोगों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए | अंत में बेसुध शहीद की पत्नी की आरती व पुष्पांजलि के बाद शव की अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया| जहाँ हजारों की संख्या के बीच शहीद सब इंस्पेक्टर दीपक भारद्वाज को राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई| उसे उनके पिता राधेलाल भारद्वाज ने शाम 6 बजे के आसपास मुखाग्नि दी|

पिहरीद के मुक्तिधाम में सांसद गुहाराम अजगल्ले, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. महंत रामसुंदर दास महंत, विधायक केशव चंद्रा, चंद्रपुर विधायक राम कुमार यादव, आईजी रतनलाल डांगी, एसपी श्रीमती पारुल माथुर, अपर कलेक्टर श्रीमती लीना कोसम, रवि शेखर भरद्वाज, पूर्व विधायक निर्मल सिन्हा, श्रीमती रश्मि गबेल, चौलेश्वर चंद्राकर, श्रीमती तुलसी साहू ने पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

आपको बता दे की हिड़मा की मौजूदगी की खबर पर बड़ी पुलिस पार्टी आपरेशन के लिए निकली थी, जहां जुनागुड़ा और एक्कल गुडुम के बीच नक्सलियों की मिलट्री बटालियन से जवानों की भीषण मुठभेड़ हुई। करीब 2 घंटे से ज्यादा चले मुठभेड़ में कई जवान शहीद हो गए, जबकि कई गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे |

तर्रेम का वो इलाक़ा जहां कल माओवादियों के ट्रेप में फँसे 22 जवानों की शहादत हुई और तीस से अधिक घायल हुए| उसी तर्रेम ईलाके में धरती बाईस बरस पांच महिने और 25 दिन पहले भी जवानों के खून से लाल हो चुकी है।
तारीख़ थी 8 अक्टूबर 1998 जबकि माओवादियों ने तर्रेम इलाक़े से गुजर रही पुलिस जवानों से भरी लॉरी और ठीक पीछे चल रही जीप को लैंड माइंस का इस्तेमाल कर उड़ा दिया था। इस हादसे में अठारह जवान शहीद हुए थे|