भारत में 10 में से 6 महिलाएं ‘पेट के मोटापे’ से प्रभावित, कमर के आकार से पहचानें स्वास्थ्य जोखिम

भोपाल 

भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण. BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा हैं।

डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ‘एब्डोमिनल ओबेसिटी’ यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं।

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एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं। 

क्या कहती है रिसर्च?
आमतौर पर हम मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से नापते हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि BMI शरीर की असल स्थिति छुपा सकता है क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. कई बार वजन सामान्य होने के बावजूद पेट पर जमी चर्बी अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक होती है इसलिए कमर की माप मापना सही रहेगा।

स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण है। 

स्टडी बताती है कि भारत में महिलाओं में एब्डॉमिनल ऑबेसिटी पुरुषों से ज्यादा है. NFHS-5 (2019-21) डेटा से पता चलता है कि भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. महिलाओं के लिए 80 सेमी और पुरुषों के लिए 94 सेमी से अधिक कमर का घेरा इस खतरे की श्रेणी में आता है. यह समस्या अब गांवों और मिडिल क्लास तक फैल चुकी है।

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फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं, ‘कमर नापना आसान है. हर डॉक्टर को मेजरमेंट टेप रखना चाहिए. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर का संकेत देता है. BMI एशियंस के लिए सटीक नहीं इसलिए वेस्ट सर्कम्फरेंस (कमर का घेरा) पर फोकस करें. यह ट्रेंड टीनएजर्स में भी दिख रहा, जो बचपन की कुपोषण के बाद फास्ट लाइफस्टाइल से प्रभावित हैं।

कारण और जोखिम
रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ना, शहरों में रहना, अधिक कमाई और नॉन-वेज खाना महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ा रहा. लीवर-पैंक्रियास के आसपास फैट मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाता है. स्टडी चेतावनी देती है इससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और यहां तक कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

खासकर मिड एज की लड़कियों में यह ट्रेंड अधिक देखा जा रहा है जो कम उम्र में खराब न्यूट्रिशन और फिर अचानक बदली हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है।

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कैसे रोक सकते हैं इस समस्या को
एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेप से कमर नापें और रूटीन चेकअप कराएं. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. अब जनरल ऑबेसिटी नहीं बल्कि एब्डॉमिनल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. ये समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है इसलिए शहरी महिलाओं को खास ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स अब सलाह दे रहे है कि वजन चेक करने के साथ-साथ अपनी कमर का घेरा नापना भी उतना ही जरूरी हो गया है।