गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल

 राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया
लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।

      राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई।

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राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।

राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया।

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समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।