50 के बाद भी रहें हेल्दी और ब्यूटीफुल

भारतीय महिलाएं अक्सर पचास की आयु के बाद स्वयं को बूढ़ा सा बडों की कैटेगिरी में रखने लगती है। उनकी सोच उन्हें अधिक बूढ़ा बना देती है। कुछ भी पहनने और संवरने से पहले वे कई बार सोचती है उन्हें लगता है कि कहीं वे लोगों के बीच हास्य का पात्र तो न हीं बन रही। विदेसों में महिलाओं की सोच बिल्कुल अलग होती है। उन्हें लगता है कि अब जो समय है वह स्वयं को अधिक खुशनुमा रखने का है, अपनी ओर ध्यान देने का है।

जिम्मेदारियां अब कम हैं, ऐसा एक सर्वेक्षण का मानना है। वैसे अब भारतीय महिलाओं की सोच में भी बदलाव आने लगा है, विशेषकर बड़े शहरों में। अगर हम इस उम्र तक पहुंचते ही अपनी सेहत अपनी लुक्स लुक्स पर ध्यान दें तो हम भी हैल्दी और ब्यूटीफुल लग सकती हैं।

कराएं जरूरी टेस्ट:- 50 वर्ष तक पहुंचते पहुंचते हमारी हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है जो आर्थराइटिस की पहचान है। इसके लिए हर दो साल में बोन डेंसिटी टेस्ट करवाते रहना चाहिए ताकि समय रहते इलाज करवाकर हम अपनी हड्डियों को बचा सकें।

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-पेशाब की रूटीन जांच करवाते रहना चाहिए। इंफेक्शन होने पर कल्चर करवाएं ताकि कोई भी इंफेक्शन हो तो पता चल सके। लंबे समय तक इंफेक्शन रहने से किडनी प्रभावित होने का खतरा रहता है.
-पेल्विक अल्ट्रासाउंड साल में दो बार करवाना चाहिए ताकि ओवरी में होने वाले ट्यूमर का पता चल सके।
-छाती का अल्ट्रासाउंड भी दो साल में एक बार करवाना चाहिए ताकि ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का समय रहते पता चल सके।
-इसके अतिरिक्त विटामिन डी, आंख, दांत, कान, डिप्रेशन, डिमेशिया आदि के टेस्ट भी करवाते रहने चाहिए।
-बीपी, ब्लडप्रेशर व कोलेस्ट्रोल की जांच भी करवाते रहना चाहिए।

करें नियमित व्यायाम: इस उम्र तक पहुंचते पहुंचते कई बार फैट शरीर के किसी विशेष भाग पर एकत्र हो जाता है। व्यायाम करते समय उस भाग को अवश्य ध्यान देते हुए करें ताकि उस भाग के फैट्स कम हो जाए। हल्के फुल्के योग आसन या व्यायाम नियमित करते रहें ताकि शरीर में लचक बनी रहे। अगर एनर्जी लेबल हाई है तो जिम ट्राई कर सकते हैं। वैसे ब्रिस्क वाक, जागिंग, स्विमिंग या कोई मनपसंद स्पोर्ट ट्राई कर सकते हैं।

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कोई भी नियमित व्यायाम करने से पहले अपने शरीर की स्थिति को ध्यान में अवश्य रखें। हर शरीर की स्थिति अलग होती है। अपने फैट्स को बर्न करने के लिए हर माह व्यायाम के तरीकों में थोड़ा बदलाव लाते रहें। संतुलित आहार जरूरी है: डाइटिशियन के अनुसार इस आयु में भी प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स की जरूरत रहती है पर इनका संतुलित मात्रा में लेना ही शरीर के लिए उचित होती है। अगर हम डाइटिशियन से अपना फूड चार्ट बनवा लें और उस पर चलें, तो हम स्वस्थ रह सकते हैं। वैसे सामान्यतः पालक, दूध, टमाटर, स्प्राउटस, फल, अंडे, नींबू, आंवला, चुकंदर, दलिया, सूखे मेवे लेते रहने चाहिए ताकि शरीर को सही खुराक मिलती रह सके।

सुंदर दिखने के लिए नेचरल उत्पादों का प्रयोग करें:

-केला स्किन और बालों के लिए बहुत अच्छा होता है। यह त्वचा को माइश्चराइज करता है। केला मैश कर उसमें तीन चार बूंदें शहद और थोड़ा सा ओटमील मिलाकर मिश्रण को फेस मास्क की तरह प्रयोग कर त्वचा को टाइट बना सकते हैं। इससे झुर्रियां दूर होती हैं, त्वचा पर ग्लो भी आता है।
-होंठ और हाथों पैरों को नर्म बनाए रखने के लिए आलिव आयल लगाएं। पूरे शरीर में नमी बरकरार रहे इसके लिए बाथटब में या नहाने वाली बाल्टी में आलिव आयल की बूंदे डालें।
-डेड स्किन को दूर करने के लिए पके पपीते को मैश कर चेहरे लगाएं और 10 मिनट बाद चेहरा धो लें।
-शहद चेहरे पर सीदे लगा सकते हैं। 15 मिनट गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। बालों पर काले शेड के स्थान पर बरगंडी शेड लगाएं।

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