Stock Market: विदेशी निवेशकों की दमदार वापसी, क्या Nifty 26,500 की ओर? बाजार में महा-तेजी के संकेत

मुंबई 

भारत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर करीब समाप्त हो गया है और विदशी निवेशकों की कम हिस्सेदारी और मजबूत घरेलू आधार के चलते भारतीय इक्विटी बाजार के लिए धारणा सकारात्मक बनी हुई है। यह जानकारी गोल्डमैन सैश के विश्लेषकों ने जुलाई में अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट में दी।

गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के को-हेड और एशिया-पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने अमोरिता गोयल और सुनील कौल के साथ लिखे नोट में कहा है कि निफ्टी जून 2027 तक बढ़कर 26,500 के स्तर पर जा सकता है, जो कि मौजूदा स्तरों से 10 प्रतिशत अधिक है।

वैश्विक निवेशकों का रुख बदला
नोट में कहा गया कि जुलाई का आउटलुक मई 2026 के उनके रुख से बिल्कुल अलग है, जब उन्हें उत्तर एशिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय इक्विटी में रिस्क-रिवॉर्ड का समीकरण 'कम आकर्षक' लगा था। इसके अलावा, उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि विदेशी निवेशक जल्द ही भारतीय बाजार में लौटेंगे, भले ही तेल की कीमतें कम हो जाएं।

मो, गोयल और कौल ने अपने नोट में लिखा है कि 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को फंडिंग मार्केट के रूप में उपयोग किया। इस दौरान केवल 3.5 महीने में ही विदेशी निवेशकों ने 30 अरब डॉलर से ज्यादा की भारतीय इक्विटी में बिकवाली की। हालांकि, जून के दूसरे पखवाड़े से विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध खरीदार हो गए हैं और इस दौरान उन्होंने करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया है।

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क्यों लौटे विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में?
इस बदलाव का सबसे प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई हालिया गिरावट को माना जा रहा है. इसके अलावा भारतीय रुपये में स्थिरता और विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव ने भारतीय बाजार के पक्ष में काम किया है. जहां जून में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी मुख्य रूप से डेट मार्केट में थी, वहीं जुलाई में उन्होंने इक्विटी में निवेश काफी बढ़ा दिया है. जुलाई के पहले 10 दिनों में आए कुल निवेश का 61% से अधिक हिस्सा अकेले इक्विटी बाजार में आया है। 

NSDL के अनुसार जुलाई में FPIs ने घरेलू इक्विटी में 15,157 करोड़ का निवेश किया है. जबकि जून में 49,340 करोड़, मई में 32,963 करोड़, अप्रैल में 60,847 करोड़ और मार्च में 1,17,775 करोड़ रुपये की भारी निकासी हुई थी. जबकि कुल निवेश करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है। 

इस बीच विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार भी संभलने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि इससे पहले मार्च और मई के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 2400 करोड़ डॉलर (करीब 2.28 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की भारी निकासी की थी. अकेले मार्च महीने में ही रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली देखी गई थी, उस समय हाई वैल्यूएशन, वैश्विक अनिश्चितताओं और कैपिटल फ्लो में उतार-चढ़ाव की वजह से निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे थे. लेकिन जुलाई ने इस वापसी के ट्रेंड को पूरी तरह मजबूत कर दिया है। 

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सरकार और आरबीआई की कोशिश 
सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सॉवरेन बॉन्ड तक पहुंच को आसान बनाने और टैक्स से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के प्रयासों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. जुलाई के शुरुआती 10 दिनों के दौरान प्रत्येक ट्रेडिंग सेशन में सकारात्मक शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सरकार के नीतिगत सुधारों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजारों पर फिर से बहाल हो रहा है। 

इसके अलावा आईटी कंपनियों में भी बॉटम आउट होने के संकेत मिल रहे हैं, खासकर लार्जकैप कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी देखने को मिल रही है. देश की दिग्गज आईटी कंपनियों TCS, HCL Teck और इंफोसिस के शेयर जुलाई महीने में निचले स्तर से 10 फीसदी तक भाग चुके हैं. टीसीएस के तिमाही रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रहे, जिससे निवेशकों का भरोसा थोड़ा बढ़ा है. सोमवार 13 जुलाई को आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. शेयर बाजार में दबाव के बावजूद आईटी स्टॉक्स TCS और HCL Teck के शेयर 7 फीसदी चढ़कर कारोबार कर रहे हैं। 

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विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए बीते महीने सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करने पर मिलने वाले ब्याज और उन्हें बेचने पर होने वाले कैपिटल गेन्स दोनों पर टैक्स से पूरी तरह मुक्ति दे दी है. पहले FPIs को ब्याज पर भारी विदहोल्डिंग टैक्स और शॉर्ट-टर्म/लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ता था, जो अब खत्म कर दिया गया है। 

अब भी ये है चिंता का विषय
नोट में आगे कहा गया कि भारतीय इक्विटी में ग्लोबल फंड्स की 'अंडरवेट' स्थिति को देखते हुए, उनके पास अपने स्थिति को संतुलित करने का काफी अच्छा मौका है। हालांकि, लगातार आय के डाउनग्रेड का दौर और दूसरे बाजारों की तुलना में ग्रोथ-वैल्यूएशन का कम आकर्षक जोड़ निवेशकों के लिए मुख्य चिंता का विषय बना रहेगा, लेकिन घरेलू रिकवरी के बारे में बेहतर जानकारी निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिकवरी को पहले से ही प्राइस-इन करने के लिए प्रेरित करेगी।"

FY27 में जमकर की बिकवाली
एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय इक्विटी से 1.28 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जून में उन्होंने 49,340 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि जुलाई में एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजारों में 15,157 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया।