परशुराम जयंती की तारीख को लेकर उलझन हुई दूर, 19 अप्रैल को प्रदोष काल में मनेगा जन्मोत्सव और यह है पूजा का शुभ मुहूर्त

 हर साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की तारीख को लेकर लोगों में बना रहता है. इस बार कुछ लोग 19 अप्रैल को मनाने बात कर रहे हैं और कुछ लोग 20 अप्रैल को. क्योंकि उसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर परशुराम जयंती की सही तारीख क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी प्रदोष काल में हुआ था. द्रिक पंचांग के मुताबिक, तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा. ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाई जाएगी.

द्रिक पंचांग के अनुसार, परशुराम जयंती पर पूजन का समय 19 अप्रैल को शाम 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा.

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कैसे मनाएं परशुराम जयंती?
इस पावन अवसर पर आप घर पर ही सरल तरीके से पूजा कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान परशुराम की तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल या साफ जल से छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें. फिर भगवान को तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और फूल या माला चढ़ाएं. दीपक जलाकर आरती करें और फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. अंत में अपनी मनोकामनाओं के लिए भगवान से प्रार्थना करें. पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और आसपास के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है.

परशुराम जयंती से मिलने वाले लाभ
परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से उपासना करने पर व्यक्ति के जीवन में साहस और पराक्रम बढ़ता है. साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मन को शांति मिलती है. मान्यता है कि इस पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कठिन से कठिन कार्यों को पूरा करने की क्षमता भी मिलती है.

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