राज्यपाल ने ममता सरकार को भंग किया, विधानसभा में वीटो लगाया

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बीच, राज्यपाल ने अपनी संवैधानिक वीटो शक्ति का प्रयोग करते हुए राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी। यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया। राज्यपाल के निर्देश पर मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी इस आदेश के बाद, राज्य सरकार का अस्तित्व प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। राज्यपाल के इस कड़े कदम से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई है, जिसके परिणामस्वरूप मंत्रिमंडल और विधानसभा, दोनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो गया, जब राज्यपाल आर. एन. रवि ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार के बीच राज्यपाल ने संवैधानिक वीटो का इस्तेमाल करते हुए 7 राज्य विधानसभा को भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी है. यह ऐतिहासिक निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत लिया गया है. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा राज्यपाल के निर्देशों पर जारी इस आदेश के बाद राज्य सरकार का वजूद समाप्त हो गया है. राज्यपाल के इस कड़े कदम ने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है, जिससे कैबिनेट और विधानसभा दोनों तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई हैं। 

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अनुच्छेद 174(2)(b) और बंगाल का अभूतपूर्व संकट
यह पूरी कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य विधानसभा को भंग करने की शक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर ऐसा करते हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जब सरकार और राजभवन के बीच टकराव चरम पर था, राज्यपाल ने इस वीटो जैसी शक्ति का इस्तेमाल कर ममता सरकार के अस्तित्व को ही समाप्त कर दिया. मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला द्वारा जारी अधिसूचना स्पष्ट करती है कि यह निर्णय राजभवन के सीधे आदेश पर लिया गया है जो राज्य में गहरे राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध का संकेत है। 

पश्चिम बंगाल गवर्नर के आदेश के मुख्‍य प्‍वाइंट्स
· ऐतिहासिक बर्खास्तगी: राज्यपाल आर. एन. रवि ने ममता बनर्जी की कैबिनेट को बर्खास्त कर 7 मई, 2026 से विधानसभा भंग करने की घोषणा की है। 

· संवैधानिक आधार: इस पूरी कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अंजाम दिया गया है, जो राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। 

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· अधिसूचना जारी: मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने आधिकारिक आदेश जारी कर बताया कि यह निर्णय राज्यपाल के निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। 

· संवैधानिक संकट: ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार के बाद यह कदम उठाया गया, जिससे राज्य में निर्वाचित सरकार का शासन समाप्त हो गया है। 

· आगे का रास्ता: विधानसभा भंग होने के बाद अब राज्य में राष्ट्रपति शासन या जल्द चुनाव की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। 

सवाल-जवाब
राज्यपाल ने किस संवैधानिक शक्ति के तहत पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है? राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग किया है। 

पश्चिम बंगाल गवर्नर का आदेश किस तारीख से प्रभावी माना जाएगा? मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा भंग करने और कैबिनेट बर्खास्त करने का यह निर्णय 7 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है। 

क्या मुख्यमंत्री की सलाह के बिना विधानसभा भंग की जा सकती है? सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करते हैं, लेकिन असाधारण परिस्थितियों या संवैधानिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल अनुच्छेद 174 के तहत स्वविवेक का प्रयोग कर सकते हैं। 

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मुख्य सचिव की पश्चिम बंगाल के गवर्नर के आदेश में क्या भूमिका रही? मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के निर्देशों को प्रशासनिक रूप से लागू किया और विधानसभा भंग करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।