FASTag + AI का जादू: टोल पर बिना रुके कटेगा शुल्क, सरकार का नया प्लान

 नई दिल्ली

देश के हाईवे पर अब वो दिन खत्म होने वाले हैं जब टोल प्लाजा पर लंबी लाइन में खड़े होकर आपका मूड और माइलेज दोनों खराब होता था. अब गाड़ी दौड़ेगी और टोल अपने आप कट जाएगा. यानी ना रुकना, ना बहस, ना चिल्ल-पों. सरकार एक ऐसा सिस्टम ला रही है जिसमें कैमरा नंबर पढ़ेगा और पैसा सीधे आपके खाते से कटेगा. यदि सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो दिसंबर तक ये बदलाव जमीन पर दिखने लगेगा और आपके सफर का एक्सपीरियंस पूरी तरह बदल जाएगा. आइये विस्तार से जानें क्या है पूरा मामला- 

देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर जल्द ही टोल प्लाजा पर रुकने की झंझट खत्म होने वाली है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 तक कई हाईवे पर सीमलेस और बैरियर-फ्री (Barrier-Free) टोल सिस्टम लागू कर दिया जाएगा. इससे सफर तेज, आसान और बिना किसी झंझट के आगे बढ़ेगा। 

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लॉजिस्टिक्स पॉवर समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि, देश में लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है. उन्होंने बताया कि सरकार दिसंबर तक कई नेशनल हाईवे पर बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम लागू करने की योजना पर काम कर रही है. इससे टोल प्लाजा पर लगने वाला समय बचेगा और ट्रैफिक भी कम होगा। 

AI और FASTag से होगा ऑटोमैटिक टोल कट
इस नए सिस्टम में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्ननिशन (ANPR) और RFID बेस्ड FASTag शामिल होंगे. हाई-परफॉर्मेंस कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट पहचानेंगे और FASTag के जरिए टोल अपने आप कट जाएगा. ड्राइवर को कहीं रुकने की जरूरत नहीं होगी। 

अगर कोई वाहन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे ई-नोटिस भेजा जाएगा. समय पर भुगतान नहीं करने पर FASTag को सस्पेंड किया जा सकता है और VAHAN से जुड़े अन्य जुर्माने भी लग सकते हैं. गडकरी ने कहा कि अगर भारत को ग्लोबल पावर बनना है तो लॉजिस्टिक्स लागत को सिंगल डिजिट तक लाना होगा। 

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास और कानपुर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बेंगलुरु की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक आ गई है. उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूरोप में यह करीब 12 प्रतिशत है, जबकि चीन में 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। 

ग्रीन फ्यूल पर जोर
गडकरी ने कहा कि भारत अपनी 87 प्रतिशत तेल जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है. हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये का फॉसिल फ्यूल आयात किया जाता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है. ऐसे में वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल को बढ़ावा देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूचर का फ्यूल है, लेकिन इसे किफायती बनाने के लिए हाइड्रोजन स्टेशन की लागत कम करनी होगी। 

गडकरी ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. सरकार का सपना है कि देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए. बेहतर सड़क नेटवर्क और कम लॉजिस्टिक्स लागत इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। 

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