कर्नाटक (Karnataka) के रायरा डोडी गांव (Raira Dodi Village) से एक अत्यंत भावुक कर देने वाला वीडियो (Viral Video) सामने आया है, जो इंसान (Human) और जानवर (Animal) के बीच के निस्वार्थ प्रेम की मिसाल पेश कर रहा है. 85 वर्षीय पर्वतम्मा, जिनका निधन 30 मार्च को उम्र संबंधी बीमारियों के कारण हुआ था, उनकी अंतिम विदाई के दौरान एक जंगली बंदर (Wild Monkey) उनके पार्थिव शरीर से लिपट गया. यह बंदर सालों से पर्वतम्मा (Parvatamma) के हाथों से भोजन ग्रहण करता था और उनकी मृत्यु पर वह किसी परिजन की तरह शोक मनाता नजर आया.
पर्वतम्मा और बंदरों के बीच यह अनूठा रिश्ता सालों पहले शुरू हुआ था. जहां गांव के कई लोग बंदरों को परेशानी का सबब मानते थे, वहीं पर्वतम्मा उन्हें अपना साथी मानती थीं. उन्होंने अपने घर आने वाले बंदरों को रोजाना भोजन और पानी देने का नियम बना लिया था. इसी दयालुता के कारण एक विशेष बंदर उनके इतना करीब आ गया था कि वह अक्सर उनके घर के आसपास ही रहता था.
जब पर्वतम्मा के अंतिम दर्शन के लिए परिवार और पड़ोसी एकत्र हुए, तो वह बंदर भी वहां पहुंच गया. चश्मदीदों के अनुसार, बंदर ने भोजन की तलाश करने के बजाय सीधे शव के पास जाकर शांति से बैठना पसंद किया. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बंदर ने अपना सिर पर्वतम्मा के सिर से सटाया और अपनी आंखें बंद कर लीं, जैसे वह गहरी पीड़ा में हो. काफी समय तक वह शव को गले लगाए रहा, जिससे वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.
सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं
इस घटना के वीडियो ने इंटरनेट पर भावनाओं का सैलाब ला दिया है. सोशल मीडिया यूजर्स इसे “कृतज्ञता का शुद्धतम रूप” बता रहे हैं. कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि जानवरों में इंसानों से कहीं अधिक संवेदना और बुद्धि होती है. एक यूजर ने लिखा, “दयालुता एक ऐसा बीज है जो एक ऐसा बंधन बनाता है जिसे मृत्यु भी नहीं तोड़ सकती.’
पशु वफादारी के ऐतिहासिक उदाहरण
यह घटना भारत में पशु वफादारी के अन्य चर्चित मामलों की याद दिलाती है. साल 2023 में केरल के कन्नूर में एक कुत्ता ‘केरल का हाचिको’ नाम से प्रसिद्ध हुआ था, जिसने अपने मालिक की मृत्यु के बाद चार महीने तक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर इंतजार किया था. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का व्यवहार उन जटिल सामाजिक बंधनों को दर्शाता है जो नियमित सकारात्मक संपर्क के माध्यम से मनुष्यों और अन्य प्रजातियों के बीच विकसित हो सकते हैं. यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रेम और करुणा की भाषा सार्वभौमिक है, जिसे बेजुबान जानवर भी बखूबी समझते और निभाते हैं.
Monkey’s emotional farewell! In a deeply moving moment from Rayara Doddi in Channapatna near Bengaluru, an 85-year-old woman who regularly fed monkeys was hugged by one of them after her passing.#Bengaluru pic.twitter.com/mpoxVZ2L86
— Anil Thakur (अनिल ठाकुर) (@Anil_NDTV) April 2, 2026