रात 9:19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य देव, संक्रांति का भ्रम ऐसे करें दूर

इस साल मकर संक्रांति 2026 को लेकर कंफ्यूजन है क्योंकि कहा जा रहा है कि 14 की जगह 15 जनवरी को ये त्योहार मनाना ज्यादा शुभ रहेगा. इसको लेकर सबसे बड़े दो तर्क दिए जा रहे हैं कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते अन्न दान नहीं किया जा सकता है और दूसरा सूर्य देव मकर राशि में रात 9 बजकर 13 मिनट पर प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में उदया तिथि यानी 15 जनवरी को ही स्नान, ध्यान, दान करना उचित माना जा रहा है. इन सब के पीछे ज्योतिषाचार्यों ने तर्क दिए हैं.

हालांकि द्रिक पंचांग के मुताबिक, मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. ये अवधि 2 घंटे 32 मिनट तक की है. इसके अलावा महापुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसकी अवधि 1 घंटा 45 मिनट है.

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पंचांग के अनुसार, ‘मकर संक्राति के शुरू होने के बाद 40 घटी तक का समय मकर संक्रांति से संबंधित शुभ कार्य करने के लिए उत्तम माना गया है. 1 घटी की अवधि 24 मिनट होती है, ऐसे में 40 घटी का समय 16 घंटे होते हैं. 40 घटी का समयपुण्य काल के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु व्रत रख पवित्र स्नान कर भगवान सूर्य को नैवेद्य अर्पण करते हैं. साथ ही साथ दान-दक्षिणा, श्राद्ध कर्म और व्रत का पारण करते हैं. ये सभी गतिविधियां पुण्यकाल के समय ही की जानी जरूरी होती हैं.’

कब मनाएं मकर संक्रांति?

द्रिक पंचांग के मुताबिक, ‘यदि मकर संक्रांति सूर्यास्त के बात होती है, तो ऐसी स्थिति में पुण्यकाल की सभी गतिविधियां अगले दिन सूर्योदय काल तक स्थगित कर दी जाती हैं, ऐसे में पुण्य काल की सभी गतिविधियां दिन के समय ही संपन्न करनी चाहिए.’ अगर, द्रिक पंचांग की मानें तो मकर संक्रांति मनाने का सही दिन 14 जनवरी है.

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15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति

मकर संक्रांति को लेकर प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने TV9 डिजिटल से बात करते हुए कहा कि कोई भी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में कूदकर नहीं जाता है. वह संचरण करते हुए जाता है. सूर्य एक दिन में एक डिग्री प्रवेश करता है और उसे दूसरे ग्रह में जाने के लिए 30 दिन लग जाते हैं इसलिए संक्रांति की काल 12 से 16 घंटे माना गया है. हमें मकर की संक्रांति चाहिए न कि धनु की. संक्रांति धनु में भी रहेगी तो भी पुण्यकाल रहेगा क्योंकि इसे 12 घंटे पहले और 16 घंटे बाद तक माना जाता है.

उन्होंने कहा कि हमें सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे उस समय मकर की संक्रांति चाहिए. काशी के पंचांगों के मुताबिक, रात में सूर्य 9 बजकर 19 पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. नारद पुराण के 123वें पेज में कहा गया है कि मकर की संक्रांति होने पर 30 घटी पहले और 40 घटी बाद तक पुण्यकाल होता है. इसी तरह धर्म सिंधु में जिक्र किया गया है. ये पुण्यकाल 15 जनवरी के मध्यान तक पड़ेगा इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी.

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मकर संक्रांति पर क्या करें दान?

मकर संक्रांति पर दान देना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है. इस दिन कन्याओं और गरीबों को दान दिया जाता है. श्रद्धालु तिल-गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल, अनाज घी और शहद दान देते हैं. दरअसल, तिल का दान करने से पाप का विनाश होता है और गुड़ दान करने से सूर्य भगवान खुश होते हैं. खिचड़ी दान करने से शनि और चंद्रमा के पड़ने वाले अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं. वहीं, गर्म कपड़े दान करने से गरीबों का आशीर्वाद मिलता हैं और काले व नीले कंबल दान करने से शनि देव की कृपा बरसती है. इसके अलावा अनाज और घी-शहद भी जीवन में मधुरता लाते हैं.