मिडिल ईस्ट में जंग का खौफ, कच्चे तेल की कीमतों पर असर, लेकिन भारत को नहीं कोई चिंता

नई दिल्‍ली

मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ी हुई है. ईरान लगातार दुबई, सऊदी और अन्‍य देशों पर मिसाइलें दाग रहा है. वहीं अमेरिका-इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं. कुछ अन्‍य देशों ने भी ईरान पर हमले की चेतावनी दी है. ऐसे में इस जंग के शांत होने के आसार फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चिंता कच्‍चे तेल को लेकर है, जिसके दाम में रिकॉर्ड तेजी आने की संभावना जताई जा रही है | 

सोमवार को कच्‍चे तेल की कीमतों में 13 फीसदी तक की उछाल देखी गई और आगे 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो दुनियाभर में महंगाई चरम पर आ सकती है, जो ग्‍लोबल इकोनॉमी के लिए भी खतरा है | 

तेल की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी आने की वजह ईरान के कंट्रोल में 'स्‍ट्रेट ऑफ होमुर्ज' गलियारा है, जहां से दुनियाभर के लिए 40 फीसदी तेल आयात होता है. इसी रास्‍ते 20 फीसदी अन्‍य गैस या एनर्जी का भी आयात किया जाता है. अकेले भारत 50 फीसदी कच्‍चे तेल का आयात करता है. इस एरिए के चोक होने की खबर है, जिसके बाद तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है | 

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भारत पर नहीं कच्‍चे तेल का संकट
हालांकि भारत को इससे डरने की जरूरत नहीं, क्‍योंकि भारत के पास रिजर्व में बहुत ज्‍यादा कच्‍चा तेल पड़ा हुआ है, जिससे भारत की जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकती हैं. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास फिलहाल अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त बफर भंडार मौजूद हैं | 

45 दिनों का भंडार 
रणनीतिक भंडार LPG और एलएनजी की मांग को लगभग 15 दिनों तक पूरा कर सकते हैं, जबकि कच्चे तेल के भंडार आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति में 45 दिनों तक चलने का अनुमान है. भारत के लिए यह  तैयारी ऐसे समय में की गई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं | 

बढ़ते तनाव के बावजूद, अधिकारियों का कहना है कि जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान या बंद होने की स्थिति में भी भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए वैकल्पिक बाजारों से ऊर्जा प्राप्त करने की अपनी क्षमता को बरकरार रखेगा. हालांकि निकट भविष्य में भौतिक आपूर्ति में व्यवधान की संभावना कम ही दिखती है. अभी कच्‍चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है | 

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कितना खास है ये मार्ग? 
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक कच्‍चे तेल का लगभग  40% और एलएनजी शिपमेंट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. इसलिए, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है | 

यूरोपियन गैस की कीमतों में 22% की तेजी
यूरोपियन नैचुरल गैस की कीमतों में लगभग 22% की तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण, खासकर ईरान पर हाल ही में US और इजराइली मिलिट्री हमलों और होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए सप्लाई में रुकावट के डर के बाद, एनर्जी कीमतों में उछाल आई है | 

2022 के गैस मार्केट में उथल-पुथल के बाद यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. डर है कि इस युद्ध से LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) और दूसरे एनर्जी शिपमेंट का फ्लो रुक सकता है या झगड़े बढ़ने पर उनका रूट बदला जा सकता है | 

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